मुख्यपृष्ठस्तंभ`रावण' के दरबार में चढ़ावा चोरी पर चर्चा!

`रावण’ के दरबार में चढ़ावा चोरी पर चर्चा!

उमन गुप्ता

अयोध्या के श्री राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की खबर लंका तक पहुंच गई है। अखबार में चोरी की खबर पढ़ कर रावण हंसने लगा।
रावण- राम मंदिर में चोरी! हा…हा…हा…। खबर पढ़ कर तो रावण का दिल खुश हो गया। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के मंदिर में चोरी हा…हा…हा। राम से इससे बड़ा बदला रावण का क्या हो सकता है? राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते थे। आज उसके भक्तों ने ही चोरी कर ली।
रावण- सुन रहे हो सेनापति! राम के मंदिर में चोरी और पृथ्वी लोक वाले हर साल रावण का पुतला दहन करते हैं। अरे! इन बेशर्मों को शर्म नहीं आई। अपने प्रभु के घर में चोरी करते हुए। इससे अच्छी तो रावण की लंका है। जहां चोरी का ‘च’ नहीं है। अरे! जो रामराज की बातें करते हैं उसके राज में चोरी। इससे बड़ी सजा हमारे दुश्मन राम के लिए क्या हो सकती है कि उसके भक्तों ने ही चोरी कर ली।
रावण- सेनापति! मीडिया को बुलाया जाए। हमारा संदेश राम तक पहुंचाया जाए कि इससे अच्छा तो रावण की लंका है।
सेनापति- महाराज! वहां का मीडिया भी वहां के ‘राजा’ से मिला हुआ है।
मगरमच्छों को बचाना है!
श्री राम मंदिर चढ़ावा चोरी के दोषियों को बचाना है, छोटी मछलियों को फंसाना है।
फेंकू की केबिन में चंपक की एंट्री!
चंपक- मालिक पोल खुल गई।
फेंकू- क्या हुआ? कौन सी पोल खुल गई?
चंपक- श्री राम मंदिर में जो हमने महा घोटाला किया है, वह उजागर हो गया है।
फेंकू- अरे चंपक! तुम चिंता मत करो।
चंपक- मालिक राम भक्त बहुत नाराज हैं। लोगों ने जैसे अयोध्या में हराया था वैसे पूरे देश में हरा देंगे।
फेंकू- चंपक तुम नादान हो। मैं चुनाव उनके वोट से नहीं जीत रहा हूं। सब चुनाव आयोग की मेहरबानी है।
चंपक- लेकिन मालिक अभी क्या करें?
फेंकू- सभी लोग शांत बैठो। मैंने सब सेटिंग कर ली है। सब ठीक हो जाएगा। छोटे-मोटे को पड़कर मामला दबा देंगे। बाकी मेरा पालतू मीडिया तो है ही।
चंपक- मालिक आप बहुत चालू हैं।
फेंकू- सही शब्द, ‘जालसाज’ है। समझे!
चंपक- समझ गया मालिक।
जांच अधिकारियों का कार्यालय
फेंकू- क्या कर रहे हो अफसर! अफसर- सर! चढ़ावा चोरी की रिपोर्ट तैयार कर रहा हूं।
फेकू- एफआईआर में कितने नाम हैं?
अफसर- सर आठ लोग हैं। छुटभैए हैं, बड़ी मछली तो बाहर है। जांच कर उसको भी जोड़ने वाला हूं।
फेंकू- नहीं! वह मेरा खास आदमी है। उसे छोड़कर बाकी को निपटाओ।
अफसर- जी सर! ओके!

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