मोदी सरकार ने आखिरकार देश में महंगाई की आग भड़का ही दी। मोदी सहित भाजपा के मुख्यमंत्रियों को अभी दो दिन पहले ही अचानक फिजूलखर्ची रोकने की हिचकियां आने लगीं और शुक्रवार को उन्होंने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का बम फोड़ दिया। पेट्रोल और डीजल के दामों में प्रति लीटर तीन रुपए की वृद्धि की गई है। मुंबई में अब पेट्रोल की कीमत बढ़कर १०६ रुपए प्रति लीटर हो गई है, जबकि एक लीटर डीजल के लिए मुंबईकरों को ९३.१४ रुपए चुकाने होंगे। सोने-चांदी से लेकर दूध तक कई चीजों के दाम पहले ही बढ़ चुके थे। उसमें सरकार ने ईंधन की कीमतें बढ़ाकर आग में घी डालने का काम किया है। पांच राज्यों के चुनाव होने तक सरकार इस मामले में मुंह में दही जमाए बैठी थी। खाड़ी युद्ध के कारण भारत की ईंधन आपूर्ति पर मोदी ने कैसे आंच नहीं आने दी, जनता को कैसे ईंधन संकट और मूल्य वृद्धि से बचाए रखा, भाजपा के लोग और उनके पिछलग्गू तब ऐसी लफ्फाजी कर रहे थे। लेकिन जैसे ही वे चुनाव खत्म हुए, वहां भाजपा का चुनावी जश्न थमा, सैकड़ों गाड़ियों के रोड-शो और उन पर लाखों रुपयों के
ईंधन की बर्बादी
पूरी हुई, वैसे ही अचानक प्रधानमंत्री मोदी को किफायत बरतने और ‘विदेशी मुद्रा बचाने’ की जोरदार याद आ गई। उन्हें देश पर मंडरा रहे र्इंधन संकट और सोने की खरीद के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे असर का अहसास हो गया। रुपए की भारी गिरावट का भान हुआ। इसके बाद उन्होंने जनता से किफायत बरतने की अपील की। जब विपक्ष ने इस बात पर उनकी आलोचना की, तो तिलमिलाए भाजपाइयों ने विपक्ष को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। तो फिर अब सरकार द्वारा की गई इस र्इंधन मूल्य वृद्धि पर उनका क्या कहना है? ईंधन के दाम बढ़ाकर और सोने के आयात पर सीमा शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) में बढ़ोतरी करके सरकार ने खुद ही विपक्ष के इन आरोपों को सच साबित कर दिया है। खाड़ी में युद्ध शुरू हुए अब करीब तीन महीने होने को हैं। इसका अलग-अलग देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ा है। लेकिन केवल मोदी की वजह से भारत कैसे इस संकट से दूर रहा, इसके ढोल पीटे जा रहे थे। अब इन ढोलों को खुद सरकार को ही फोड़ना पड़ा है। मोदी द्वारा
किफायत बरतने की अपील के
महज तीन दिन बाद ही सरकार ने जनता को महंगाई की भट्ठी में झोंक दिया। सोने-चांदी की कीमतें तो पहले ही आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चुकी हैं। दूध दो रुपए महंगा हो गया है। अब पेट्रोल-डीजल महंगा होने से सब्जियों और फलों से लेकर सभी आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ जाएंगे। इसके अलावा, पेट्रोल-डीजल की यह मूल्य वृद्धि यहीं रुक जाएगी, ऐसी भी संभावना कहां है? अगर खाड़ी में युद्ध की स्थिति नहीं सुधरी तो इन कीमतों का और बढ़ना तय है। भले ही अंधभक्त मोदी को ‘विश्वगुरु’ वगैरह कह रहे हों, लेकिन खाड़ी का युद्ध, उससे उत्पन्न वैश्विक स्थिति और भारत पर उसका प्रभाव रोकना अब मोदी के बस की बात नहीं रही, यह साफ हो चुका है। देश इस समय गंभीर आर्थिक और र्इंधन संकट के मुहाने पर खड़ा है। सरकार ने जनता को महंगाई के ज्वालामुखी के मुहाने पर ला खड़ा किया है। पेट्रोल-डीजल की मूल्य वृद्धि का सरकार द्वारा ‘दबाकर रखा गया सच’ आखिरकार सरेआम आ ही गया। जनता ने मोदी को लगातार तीन बार देश की सत्ता सौंपी। पांच में से तीन राज्य उनकी झोली में डाल दिए। बदले में मोदी ने जनता को महंगाई का ‘रिटर्न गिफ्ट’ दिया है!
