फिरोज खान / मुंबई
जब-जब सोने पर टैक्स या ड्यूटी बढ़ाई गई है, तब-तब गोल्ड तस्करी के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने फिर एक बार गोल्ड पर इंपोर्ट टैक्स बढ़ा दिया है, जिससे लाइसेंस धारी गोल्ड व्यापारियों का धंधा चौपट होगा, वहीं अब गोल्ड तस्करों की ‘बल्ले-बल्ले’ हो जाएगी।
साल २०२४ के आंकड़ों पर गौर करें तो उस वक्त ड्यूटी कम की गई थी, जिसके सकारात्मक परिणाम मिले थे और तस्करी के मामलों में गिरावट आई थी, लेकिन अब फिर से पुरानी स्थिति लौट आई है। जानकारों का कहना है कि ऊंचे टैक्स के कारण लोग चोरी-छिपे सोना लाने वाले नेटवर्क पर निर्भर होने लगते हैं, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान तो होता ही है, साथ ही बाजार की पारदर्शिता भी खत्म हो जाती है।
जब भी ड्यूटी बढ़ी, दोगुनी हुई सोने की तस्करी!
सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने से तस्करी बढ़ने की पूरी संभावना बढ़ जाती है। हाल ही में भारत सरकार ने सोने और चांदी पर प्रभावी आयात शुल्क को ६ फीसदी से बढ़ाकर १५ फीसदी कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है जब आयात शुल्क बढ़ता है तो देश के भीतर सोने के दाम अंतर्राष्ट्रीय बाजार की तुलना में काफी बढ़ जाते हैं। इससे अवैध तरीके से सोना लाने पर तस्करों को बहुत अधिक मुनाफा मिलता है। साल २०२२ में भी जब ड्यूटी को १५ फीसदी किया गया था, तब अगले वित्त वर्ष में सोने की जब्ती दोगुनी होकर ४,३४३ किलोग्राम तक पहुंच गई थी।
इतनी भारी ड्यूटी बढ़ने के बाद बाजार के जानकारों और बुलियन डीलरों ने एक गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि जब कानूनी तौर पर सोना लाना बहुत महंगा हो जाता है तो अवैध रास्ते यानी तस्करी का धंधा बढ़ जाता है।
एक और गोल्ड मार्केट के स्पेशलिस्ट ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया टैक्स बढाने से लाइसेंसधारी इंपोर्टरों का हाल बेहाल हो गया है और पूरा गोल्ड मार्केट मानो गोल्ड सम्गलरों के हाथ में चला गया है। मुंबई में सोने की तस्करी के मुख्य कारण भारत में सोने की उच्च मांग और विदेशों (विशेषकर दुबई) के मुकाबले भारत में इसकी कीमतों में बड़ा अंतर होना है। दुबई और खाड़ी देशों में सोना भारत की तुलना में लगभग १०-२० प्रतिशत सस्ता होता है। तस्कर कम कीमत पर सोना खरीदकर भारत में महंगे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। ऊंची इंपोर्ट ड्यूटी भारत में सोने के आयात पर भारी टैक्स लगाया जाता है।
पेस्ट, पाउडर और कैप्सूल
इस टैक्स को बचाने के लिए तस्कर अवैध रास्तों और मुंबई एयरपोर्ट जैसे व्यस्त हब का सहारा लेते हैं। तस्कर अब सोने को पेस्ट, पाउडर या कैप्सूल के रूप में छिपाकर लाते हैं, जिन्हें मेटल डिटेक्टर्स से पकड़ना मुश्किल होता है। हाल के मामलों में महिलाओं का उपयोग और कूरियर सेवाओं का दुरुपयोग भी देखा गया है। एक और गोल्ड व्यापार से जुड़े शख्स ने बताया पहले इंपोर्ट ड्यूटी कम होने के बावजूद बड़े पैमाने पर गोल्ड स्मगलिंग होती रही है। अब ड्यूटी बढ़ाने के बाद स्मगलिंग का धंधा कई गुना बढ़ेगा।
कस्टम अधिकारियों की मिलीभगत
एक पुराने तस्कर के मुताबिक, गोल्ड तस्करी में पहले जैसा मुनाफा नहीं रह फिर भी गोल्ड स्मगलिंग की जा रही है। इसकी खास वजह यह है कि कमाई का बड़ा हिस्सा कस्टम अधिकारियों की जेब में जाता है।
गोल्ड स्मगलरों की ‘चांदी’
१९८० के दशक में गोल्ड स्मगलिंग का धंधा करने वाले सम्गलर ने बताया इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने का मतलब है गोल्ड तस्करों की चांदी। एक समय में हाजी मस्तान के साथ गोल्ड स्मगलिंग करने वाले शख्स ने बताया अब सोना तस्करों का धंधा भी बढेगा और नफा भी बढेगा। काफी सालों से गोल्ड तस्करी का धंधा छोड़ चुके एक अन्य शख्स ने बताया १९८० से ९० के बीच साढ़े ११ ग्राम सोना दुबई में १४ हजार में मिलता था और वे भारत में २८ हजार में बेचते थे।
