गणपति, गणेश, गणनायक इत्यादि शब्द ही मंगलमय है। गणेश साक्षात परब्रह्म हैं। मात्र उनका स्मरण ही विघ्नविनाशक है। इन्हें प्रसन्न करने के लिए विशेष श्रम नहीं करना पड़ता है। इन्हें प्रसन्न करने के प्रयोग निम्न लिखित हैं-
सामग्री- श्री गणेश यंत्र, मूंगे की माला, लाल आसन, घी का दीपक (यंत्र की अनुपलब्धता में पार्थिव गणेश या गणेशजी का चित्र भी प्रयोग कर सकते हैं)।
प्रथम- `ॐ गुं गुरुभ्यो नम:’ की ४ माला जाप करें। पश्चात श्री गणेशजी का षोडषोपचार या पंचोपचार पूजन करें। स्मरण रहे- लाल वस्त्र पर चावल की ढेरी लगाकर गणेशजी को स्थापित करें। यंत्र इत्यादि न उपलब्ध हो तो सुपारी पर कलावा लपेटकर गणेशजी का ध्यान करें। पश्चात
१. साधारण मंत्र- `ॐ गं गणपतये नम:’ के २१-५१ माला जप करें।
२. `ॐ वक्रतुण्डाय हुं’
३. जिन व्यक्तियों या परिवार पर ऋण का बोझ बढ़ता जा रहा हो, वे उपरोक्त गणपति मंत्र की जगह निम्न मंत्र को जपें।
`ॐ गणेश ऋणं छिन्धि छिन्धि वरेण्यं हुं नम: फट्।’
