जे आनंद
यह पदयात्रा १० अप्रैल २०२६ को पुणे से तीन वैâब चालकों द्वारा शुरू की गई थी। आंदोलनकारी चालकों का कहना है कि राज्य में ऐप आधारित कंपनियों की मनमानी से हजारों चालकों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है, लेकिन सरकार और परिवहन विभाग इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कदम उठाने में नाकाम नजर आ रहे हैं।
आंदोलनकारियों के अनुसार, यह पदयात्रा आज यानी १५ अप्रैल २०२६ को दोपहर ४ बजे मुंबई के आजाद मैदान पहुंचेगी। वहां परिवहन अधिकारियों से मुलाकात कर चालकों की समस्याओं से जुड़ा विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा।
पदयात्रा के दौरान आंदोलनकारी चालकों ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों का दौरा कर प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखीं। उनका आरोप है कि ओला, उबेर और रैपिडो जैसी कंपनियां राज्यभर में नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रही हैं और मनमाने तरीके से संचालन कर रही हैं, जिससे चालकों में भारी असंतोष पैâल गया है। चालकों ने यह भी आरोप लगाया कि परिवहन विभाग के निर्देशों के बावजूद ऐप पर मनमाने किराए दिखाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, वैध अनुमति के अभाव और कई एफआईआर दर्ज होने के बावजूद मुंबई और नागपुर जैसे शहरों में बाइक टैक्सी सेवाएं जारी हैं, जिससे पारंपरिक वैâब और रिक्शाचालकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
इसके अलावा ‘पैनिक बटन’ के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूली, कमीशन में पारदर्शिता की कमी और शासन द्वारा तय दरों का पालन न करने जैसे मुद्दों को भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। इस पदयात्रा के दौरान राज्य के कई शहरों और कस्बों में रिक्शा और कैब चालकों ने आंदोलनकारियों का स्वागत कर अपना समर्थन जताया। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि कैब चालकों में बढ़ता असंतोष अब बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
आंदोलनकारी चालकों ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग से मांग की है कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए ऐप कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए तुरंत ठोस और सख्त कार्रवाई की जाए।
