सुरेश गोलानी / भायंदर
भायंदर (पश्चिम) स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम से सटी सड़क पर अवैध रूप से खड़ी निजी लग्जरी बसों से चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात वाली कहावत चरितार्थ सिद्ध होती दिखाई दे रही है, क्योंकि मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय के यातायात (ट्रैफिक) विभाग द्वारा कुछ समय तक सख्त रुख अपनाने के बाद अवैध पार्किंग का सिलसिला फिर से शुरू हो गया है। यह इस बात का प्रतीक है कि या तो ट्रैफिक पुलिस का भय खत्म होता जा रहा है या फिर कथित रूप से रिश्वतखोरी का खेल जारी है।
दोपहर का सामना ने (४ अगस्त) के अंक में (असामाजिक तत्वों का आश्रय बना भायंदर का अवैध भायंदर का अवैध पार्किंग अड्डा) भायंदर-पश्चिम के अहम मुद्दे को उठाया और किस तरह एक अवैध पार्किंग अड्डा नागरिकों की सुरक्षा पर बहुत बड़े खतरे की तरह मंडरा रहा है, को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर का संज्ञान लेते हुए यातायात पुलिस ने अवैध रूप से खड़ी निजी इंटरसिटी और अंतरराज्यीय लग्जरी बसों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए मुहिम छेड़ी और अवैध पार्किंग पर रोक लगा कर और नियमित गश्त के माध्यम से सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए। मुहिम के दौरान पुलिस की टीमों ने ६५ बसों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम,१९८८ की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए कुल ७ लाख ४५ हज़ार रुपयों से ज्यादा के ई-चालान काटे। इसके अलावा पुलिस ने दावा किया था कि नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी संचालकों को सख्त चेतावनी दी गई है कि अगर उनके चालकों ने फिर से अवैध रूप से बसें पार्क कर लोगों की सुरक्षा को खतरे में डाला तो उनके परमिट रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। इस चेतावनी और कार्रवाई का असर कुछ हफ्तों तक दिखा, जिसके बाद पुलिस ठंडी पड़ गई और बसों ने फिर से अपना स्थान ले लिया। विशाल झुग्गी बस्तियों, रिहायशी इमारतों और व्यावसायिक आस्थापनाओं (वर्कप्लेस) के पास स्थित सड़क प्रशासन की अनदेखी और लापरवाही के कारण फिर से अवैध पार्किंग स्थल में तब्दील हो चुका है, जहां मौजूद दर्जनों बसें असामाजिक तत्वों के लिए सुरक्षित आश्रय यानी शरणस्थली बन गई हैं। स्थानीय नागरिक खासकर पास की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले बच्चे जो यहां खेलने आते हैं और सड़क से गुजरने वाली महिलाएं इन बसों की उपस्थिति के कारण अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
२०२० में हुई थी दिल दहला देने वाली घटना
१८ दिसंबर २०२० को शाम के समय एक चार वर्षीय बच्ची अपने दोस्तों के साथ इसी अवैध पार्किंग में खड़ी बस में खेल रही थी। थोड़ी देर बाद अन्य सभी बच्चे बस से उतरकर अपने घर चले गए, लेकिन बच्ची रहस्यमय ढंग से गायब हो गई। पुलिस ने चालक को गिरफ्तार कर लिया, जिसने बस के अंदर लड़की का यौन उत्पीड़न करने और उसका गला घोंटने का प्रयास करने की बात कबूल की। उसने बेहोश लड़की को एक बोरे में डाला और उसे वसई के वालिव इलाके में एक सुनसान जगह पर फेंक दिया। पुलिस ने बच्ची को खोज निकाला और उसे उसके परिवार के हवाले कर दिया।
