अनिल तिवारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल हैदराबाद से देश की जनता के नाम एक संदेश दिया, जिसमें उन्होंने आगामी १ साल तक लोगों से सोना न खरीदने की अपील की। भारत में सोने के कारोबार से सीधे जुड़े लोगों की संख्या करीब ५० लाख से ६१ लाख तक मानी जाती है। इसमें जौहरी, कारीगर, थोक व्यापारी, खुदरा दुकानदार, डिजाइनर, पॉलिशिंग/कास्टिंग कर्मचारी, हॉलमार्किंग, रिफाइनिंग, आयात-निर्यात और छोटे-बड़े निर्माण केंद्र शामिल हैं। जिससे गोल्ड शटडाउन की स्थिति में ६० लाख से अधिक परिवारों पर सीधा असर पड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
६१ लाख लोगों को रोजगार
सरकारी/उद्योग स्रोतों में आंकड़े अलग-अलग हैं, पीआईबी/आईबीईएफ के अनुसार, जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर लगभग ५० लाख लोगों को रोजगार देता है, जबकि नीति आयोग की गोल्ड मार्वेâट रिपोर्ट में सोने से जुड़े एमएसएमई आधारित उद्योग में करीब ६१ लाख लोगों के रोजगार का उल्लेख है। अर्थात, इस अघोषित गोल्ड शटडाउन का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष असर जोड़ें तो यह संख्या लगभग ७० लाख से ९० लाख लोगों तक पहुंच सकती है।
कई सेक्टर होंगे प्रभावित
अप्रत्यक्ष रूप से पैकिंग, सुरक्षा, कुरियर, बीमा, बैंकिंग/गोल्ड लोन, विज्ञापन, शादी-ब्याह बाजार, लॉजिस्टिक्स, हॉलमार्विंâग सेंटर, किराए की दुकानें, उपकरण आपूर्तिकर्ता और छोटे वित्तीय लेन-देन भी प्रभावित होते हैं। यह अनुमान है, क्योंकि नीति आयोग ने खुद माना है कि सोने के उद्योग में रोजगार और जौहरियों की संख्या पर समेकित सरकारी डेटा की कमी है।
तुरंत बेरोजगार हो जाएंगे ४५ लाख स्वर्ण कारीगर!
पीएम मोदी द्वारा एक साल तक सोना न खरीदने की अपील के बाद इस व्यवसाय से जुड़े लोगों में बेचैनी है। अगर पूरे एक साल तक देश में सोने की खरीद-फरोख्त बंद हो जाए तो सबसे पहले चोट कारीगरों और छोटे जौहरियों पर पड़ेगी। भारत के सोने के आभूषण कारोबार में हाथ से बनने वाली ज्वेलरी की बड़ी भूमिका है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, निर्मित ज्वेलरी का करीब ५५ प्रतिशत हिस्सा हाथ से कारीगरों द्वारा बनाया जाता है। यानी मांग रुकते ही कास्टिंग, फाइलिंग, पॉलिशिंग, सेटिंग, डिजाइनिंग और मरम्मत जैसे काम ठप पड़ जाएंगे। व्यावहारिक अनुमान यह है कि एक साल की बंदी में कम से कम ३५ लाख से ४५ लाख लोगों पर तत्काल बेरोजगारी या आय-रुकावट का संकट आ सकता है। इनमें दिहाड़ी/पीस-रेट कारीगर, छोटे वर्कशॉप, जवेरी बाजार जैसे थोक केंद्रों के कर्मचारी और छोटे शहरों के पारंपरिक सुनार सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इसका सबसे बड़ा प्रभाव कारीगर/स्वर्णकारों के काम पर पड़ेगा। उनका उद्योग तुरंत घटेगा या बंद होने के कगार पर पहुंच जाएगा।
नकदी चक्र टूटेगा
छोटे जौहरियों का नकदी चक्र टूटेगा, दुकान खर्च भारी पड़ेगा। थोक व्यापारियों का स्टॉक फंस जाएगा, लेन-देन रुक जाएगा। हॉलमार्विंâग/रिफाइनिंग जांच और प्रोसेसिंग का काम घटेगा। लॉजिस्टिक्स/सुरक्षा माल ढुलाई और सुरक्षा सेवाएं प्रभावित होंगी। शादी-ब्याह का बाजार ज्वेलरी से जुड़े खर्च और ऑर्डर रुकेंगे। क्योंकि सोने का कारोबार केवल आभूषण बेचने का मामला नहीं है। भारत में शादी-ब्याह, बचत, विरासत, गिरवी, गोल्ड लोन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से इसका गहरा रिश्ता है।
आधी खरीदारी शादियों में
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, भारत में सोने की वार्षिक मांग का लगभग आधा हिस्सा शादियों से जुड़ा होता है। इसलिए सालभर की बंदी से न केवल दुकानें, बल्कि सामाजिक-आर्थिक लेन-देन भी प्रभावित होंगे। कुल मिलाकर भारत में सोने के कारोबार से सीधे तौर पर लगभग ५०–६१ लाख लोग जुड़े हैं। अप्रत्यक्ष रोजगार जोड़ने पर यह दायरा ७०-९० लाख तक माना जा सकता है। यदि एक साल तक सोने की खरीद-फरोख्त पूरी तरह बंद हो जाए तो ३५-५० लाख लोगों की रोजी-रोटी पर गंभीर संकट आ सकता है। सबसे अधिक चोट असंगठित कारीगरों, छोटे सुनारों और ज्वेलरी वर्कशॉपों पर पड़ेगी।
