राजन पारकर
भारतीय राजनीति में पहले कहा जाता था कि गंगाजल सारे पाप धो देता है, लेकिन अब लोकतंत्र में एक नई राजनीतिक गंगा अवतरित हुई है – भाजपा प्रवेश! जो नेता कल तक भ्रष्टाचार, घोटालों, रिश्वतखोरी और जनता के धन की लूट के प्रतीक बताए जाते थे, वही आज भाजपा की कृपा से मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री बनकर सत्ता के सिंहासन पर विराजमान हैं।
हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के शब्दों में कहें तो – ‘यह पार्टी नहीं, बल्कि राजनीतिक धुलाई केंद्र है, जहां आरोप धुलते हैं और पद खिलते हैं!’
महाराष्ट्र : सिंचाई घोटाले के आरोपी से सत्ता के शिखर तक अजीत पवार पर ७०,००० करोड़ के सिंचाई घोटाले का आरोप लगा। मंचों से उनके भ्रष्टाचार की दुहाई दी गई। लेकिन जैसे ही भाजपा की शरण मिली, सारे आरोप ऐसे गायब हुए मानो वॉशिंग मशीन में धुल गए हों। परिणाम- उपमुख्यमंत्री पद! अब जनता समझे कि आरोप जितना बड़ा, पद उतना ऊंचा।
असम : लुई बर्गर से मुख्यमंत्री कुर्सी तक
हिमंत बिस्वा सरमा पर कभी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए। लेकिन भाजपा में प्रवेश के बाद वे अचानक राष्ट्रनिर्माता बन गए। जनता देखती रह गई कि कल का आरोपी आज मुख्यमंत्री है।
बंगाल : रिश्वत के वीडियो से सत्ता के गलियारे तक शुभेंदु अधिकारी को कभी मंचों पर भ्रष्टाचार का प्रतीक बताया गया। वीडियो दिखाए गए, भाषण हुए, नैतिकता की दुहाई दी गई। फिर वही नेता भाजपा के राजनीतिक परिवार में शामिल होकर मुख्यमंत्री पद का चेहरा बन गया। वाह री राजनीति! कल का भ्रष्टाचारी, आज का संस्कारी!
बिहार : आरोपों से अलंकृत नेतृत्व सम्राट चौधरी पर जब तक वे विपक्ष में थे, आरोपों की वर्षा होती रही। भाजपा में प्रवेश करते ही सारे आरोपों का श्राद्ध हो गया। अब वे सत्ता के सबसे विश्वसनीय चेहरों में गिने जाते हैं।
उत्तराखंड : बहुगुणा का पवित्र पुनर्जन्म
विजय बहुगुणा पर भ्रष्टाचार और बिल्डर लॉबी से सांठ-गांठ के आरोप लगे। लेकिन भाजपा रूपी तपोभूमि में प्रवेश के बाद वे भी पवित्र हो गए। राजनीति में इससे बड़ा मोक्ष शायद ही कहीं मिलता हो।
अरुणाचल प्रदेश : आरोपों से भाजपा के आशीर्वाद तक पेमा खांडू पर पहले तीखे आरोप लगाए गए। फिर पूरी टोली समेत भाजपा में स्वागत हुआ। मुख्यमंत्री पद बरकरार रहा, बस विचारधारा बदल गई।
त्रिपुरा : आरोपित से आदर्श नेता तक माणिक साहा भी आरोपों की धूप में तपे, फिर भाजपा की छांव में शीतल हुए। आज सत्ता के शीर्ष पर हैं।
मणिपुर : कांग्रेस से भाजपा तक मुख्यमंत्री यात्रा एन. बीरेन सिंह पर भी आरोप लगे, लेकिन भाजपा में आते ही वे सुशासन के प्रतीक बन गए।
राजनीति सचमुच अवसरों का महासागर है। आज की राजनीति का नया सिद्धांत स्पष्ट है – ‘पहले विपक्ष में रहो, आरोप झेलो, भाजपा में आओ और मुख्यमंत्री बन जाओ!’ ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ का नया राजनीतिक अर्थ शायद यही है – ‘पहले आरोप लगाऊंगा, फिर पार्टी में लाऊंगा और अंतत: सत्ता सौंप दूंगा!’ भारतीय लोकतंत्र का यह दृश्य व्यंग्य नहीं, बल्कि कटु यथार्थ बन चुका है। यहां विचारधारा नहीं, सत्ता सर्वोपरि है। जनता के लिए नैतिकता के भाषण हैं और नेताओं के लिए राजनीतिक वॉशिंग मशीन।
आज का राजनीतिक सूत्र :
‘भ्रष्टाचार का आरोप लगवाओ, भाजपा में शामिल हो जाओ और सत्ता का मुकुट पहन जाओ!’
