-२०२४ में ७६,०२४ कामकाजी युवाओं की आकस्मिक मौतें
-राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का खुलासा
सामना संवाददाता / मुंबई
भारत की युवा आबादी को देश की सबसे बड़ी शक्ति कहा जाता है, लेकिन राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े इस शक्ति के सामने खड़े गंभीर खतरे की ओर संकेत करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, देश में अचानक होने वाली मौतों में कामकाजी उम्र के पुरुषों की संख्या चिंताजनक रूप से अधिक है। वर्ष २०२४ में कुल ७६,०२४ आकस्मिक मौतों में करीब ८४ प्रतिशत, यानी ६३,४९३ पुरुष थे, जबकि महिलाओं की संख्या १२,५२१ रही।
सबसे चिंता की बात यह है कि सड़क हादसे अब भी अचानक मौतों की सबसे बड़ी वजह बने हुए हैं। वर्ष २०१७ में अचानक मौतों में सड़क दुर्घटनाओं की हिस्सेदारी ४५.१ प्रतिशत थी और वर्ष २०२४ में भी यह करीब ४३ प्रतिशत के आसपास रही। यानी सड़क सुरक्षा पर नियम, अभियान और दिशा-निर्देश तो लगातार बनते रहे, लेकिन जमीन पर उनका असर अपेक्षित रूप से दिखाई नहीं दे रहा। दूसरी गंभीर चुनौती हृदयाघात से जुड़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, ३० से ६० वर्ष आयु-वर्ग के पुरुषों में हृदयाघात से मौतें वर्ष २०१७ में १४,०११ थीं, जो वर्ष २०२४ में बढ़कर २३,६०० हो गर्इं। यह आंकड़ा बताता है कि शहरी जीवनशैली, तनाव, अनियमित दिनचर्या, धूम्रपान, शराब, मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे कारण युवाओं और मध्यम आयु-वर्ग के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।
परिवारों के लिए चेतावनी
कोरोना टीके को लेकर पैâली आशंकाओं पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा है कि टीके और हृदयाघात के बीच सीधा संबंध नहीं मिला। यानी असली लड़ाई अफवाहों से नहीं, बल्कि जीवनशैली, स्वास्थ्य-जांच और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती से है। यह आंकड़ा केवल मृत्यु का हिसाब नहीं, बल्कि शासन, समाज और परिवार, तीनों के लिए चेतावनी है।
