-प्रदर्शन खत्म, पुलिस की खोज जारी
-छात्रों पर दर्ज मामले वापस लेने की बात, लेकिन ‘साजिश’ की पड़ताल जारी;
अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा के खिलाफ कई थानों में शिकायत
नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए व्यापक छात्र आंदोलन और उससे जुड़ी हिंसक घटनाओं के बाद भले ही प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही जा रही हो, लेकिन दिल्ली पुलिस ने आंदोलन के पीछे कथित साजिश और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच बंद नहीं की है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, फेस रिकॉग्निशन सिस्टम और वीडियो फुटेज के जरिए पहचाने गए करीब २,५०० लोग अब भी जांच के दायरे में हैं। हालांकि, इन सभी व्यक्तियों को आरोपी या आपराधिक पृष्ठभूमि वाला मानना उचित नहीं होगा; पुलिस को प्रत्येक मामले में स्वतंत्र साक्ष्य जुटाने होंगे।
दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया निगरानी टीम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक, अपमानजनक और भड़काऊ पोस्ट, वीडियो तथा टिप्पणियों की पहचान तेज कर दी है। विभिन्न सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस भेजकर कुछ सामग्री हटाने को कहा गया है। करीब १८० सोशल मीडिया हैंडल भी कथित भ्रामक या उत्तेजक सामग्री प्रसारित करने के आरोप में जांच के दायरे में बताए गए हैं।
इसी बीच पश्चिम बंगाल में अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा भी विवादों में घिर गई हैं। २४ जुलाई को कोलकाता में नीट पेपर लीक के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन के दौरान वह एक ऐसे पोस्टर के साथ दिखाई दीं, जिस पर प्रधानमंत्री की कथित अश्लील और आपत्तिजनक तस्वीर बनी थी। भाजपा प्रवक्ता केया घोष ने आनंदपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। बिधाननगर साइबर क्राइम थाने सहित अन्य जिलों में भी शिकायतें दिए जाने की खबर है।
श्रीलेखा मित्रा ने सफाई दी कि वह अपना चश्मा भूल गई थीं और पोस्टर को ठीक से देख नहीं पाईं। अब बड़ा सवाल यह है कि कार्रवाई कानून के आधार पर होगी या सरकार-विरोधी अभिव्यक्ति को दबाने का नया माध्यम बनेगी।
