दोस्ती का रिश्ता हंसी-मजाक और भरोसे का होता है, लेकिन नागपुर के परडी इलाके में एक छोटा-सा मजाक खूनी अंजाम तक पहुंच गया। एक दोस्त ने दूसरे को थप्पड़ मारा और जवाब में गुस्से की आग ने एक जिंदगी छीन ली। ४० साल के जितेंद्र उर्फ जीतू की हत्या की ये घटना दिल दहलाने वाली है, जो हमें रिश्तों की नाजुकता और गुस्से के खतरनाक परिणामों की याद दिलाती है।
मजाक से शुरू हुई कहानी, खून से लिखा अंत
इसी साल अप्रैल महीने की एक शाम को नवीन नगर में जितेंद्र अपने दोस्तों से मिलने पहुंचा था। वहां उनके साथ ३५ साल का इतवारीदास शिवदास मनीकपुरी और एक अन्य दोस्त मौजूद था। तीनों दोस्तों के बीच हंसी-ठिठोली चल रही थी। बात-बात में मोबाइल छिपाने का मजाक शुरू हुआ। मनीकपुरी ने जितेंद्र से मजाक में छिपाया गया फोन लौटाने को कहा, लेकिन जितेंद्र ने मना कर दिया। यहीं से हंसी-मजाक बहस में बदल गई।
थप्पड़ से भड़की आग
बात इतनी बढ़ी कि गुस्से में जितेंद्र ने मनीकपुरी को थप्पड़ जड़ दिया। ये छोटी-सी घटना इतनी भारी पड़ गई कि मनीकपुरी ने धमकी दी, ‘मैं तुझसे बाद में निपटूंगा!’ वो गुस्से में वहां से चला गया, लेकिन कुछ देर बाद लाठी लेकर लौटा। उस वक्त जितेंद्र फुटपाथ पर बैठा था। गुस्से से आगबबूला मनीकपुरी ने जितेंद्र पर लाठी से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। जितेंद्र के सिर पर गहरी चोटें आईं, और वो खून से लथपथ जमीन पर गिर पड़ा।
अस्पताल पहुंचने से पहले टूटी सांसें
स्थानीय लोगों ने तुरंत परडी पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने जितेंद्र को फौरन अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी मचा दी। लोग हैरान हैं कि दोस्ती का मजाक इतने भयावह अंजाम तक वैâसे पहुंच गया। पुलिस ने मनीकपुरी को गिरफ्तार कर लिया।
गुस्सा बना कातिल, दोस्ती हुई शर्मसार
ये घटना सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं, बल्कि गुस्से और आवेग के खतरनाक परिणामों की चेतावनी है। एक छोटा-सा मजाक, जो हंसी से शुरू हुआ, ने एक दोस्त की जिंदगी छीन ली और दूसरे को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। क्या एक थप्पड़ इतना बड़ा अपराध बन सकता है कि वो हत्या तक पहुंच जाए? ये सवाल हर किसी के मन में है। आप क्या सोचते हैं?
