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कानून बना, पर जमीनी समर्थन अधूरा… यूपी में ‘नारी शक्ति वंदन’ के लिए कॉलेजों में उठ रही जागरूकता की लहर

राजेश सरकार / प्रयागराज

नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 भले ही महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल के रूप में सामने आया हो, लेकिन उत्तर प्रदेश में इसकी जमीनी स्वीकार्यता और व्यापक समर्थन की जरूरत आज भी महसूस की जा रही है। यही वजह है कि अब जागरूकता की लड़ाई शिक्षण संस्थानों तक पहुंच चुकी है, जहां युवा वर्ग इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में जुटा है।
सशक्त पहल
सोमवार को हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नैनी में इस मुद्दे पर एक सशक्त पहल देखने को मिली। प्राचार्य प्रो.ओम प्रकाश के निर्देशन में मिशन शक्ति फेज-5 और राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में छात्र-छात्राओं ने महिला शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में मानव श्रृंखला बनाकर एकजुटता का प्रदर्शन किया।
मानव श्रृंखला और हस्ताक्षर अभियान
महाविद्यालय परिसर में बनी इस मानव श्रृंखला ने यह साफ संदेश दिया कि “नारी सम्मान सिर्फ कानून से नहीं, समाज के समर्थन से मजबूत होता है।” इसके साथ ही चलाए गए हस्ताक्षर अभियान में छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए अधिनियम के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद की।
दो टूक
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने दो टूक कहा कि जब तक समाज के हर वर्ग की मानसिकता में बदलाव नहीं आता, तब तक कोई भी कानून अपने पूर्ण उद्देश्य को हासिल नहीं कर सकता। नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 को भी जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए ऐसे जनजागरण अभियानों की बेहद जरूरत है।
मजबूत समर्थन की जरूरत
छात्राओं ने मानव श्रृंखला के माध्यम से यह संदेश दिया कि आज की नारी जागरूक है, संगठित है और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को तैयार है लेकिन उसे समाज के मजबूत समर्थन की दरकार अब भी बनी हुई है।
सशक्त माध्यम है शिक्षा
प्राध्यापकों ने भी छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह सबसे सशक्त माध्यम है, जिससे महिलाएं अपने अधिकारों को पहचानकर समाज में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।
लिया शपथ
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने महिला सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकारों के लिए निरंतर जागरूकता फैलाने की शपथ ली। इसका संचालन राजनीति शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. हेमलता ने किया। उल्लेखनीय है कि यह आयोजन इस सच्चाई को उजागर करता है कि कानून बन जाना अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है। असली लड़ाई समाज की सोच बदलने और महिलाओं के अधिकारों को व्यवहार में उतारने की है, जिसके लिए आज भी ‘नारी शक्ति वंदन’ को व्यापक जनसमर्थन की जरूरत है।

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