मुख्यपृष्ठधर्म विशेषअत्यंत शुभ है माघ की गणेश चतुर्थी

अत्यंत शुभ है माघ की गणेश चतुर्थी

शीतल अवस्थी

माघ की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को संकष्टी गणेश चतुर्थी, माघी चतुर्थी, तिल चौथ या वक्रतुंडी चतुर्थी भी कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश हैं। इस दिन विशेष रूप से भगवान श्रीगणेश व चंद्रमा की पूजा की जाती है। भगवान गणेश को तिल के लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। गणेशजी को भगवान शिव से वरदान प्राप्त है कि जो व्यक्ति संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखकर गणेशजी की पूजा करेगा और शाम में चंद्रोदय के बाद शिव सहित गणेशजी की पूजा करेगा उसके सारे संकट दूर हो जाएंगे।
मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी के व्रत से शारीरिक कष्ट एवं मानसिक परेशानियों में कमी आती है। यह व्रत आर्थिक समस्याओं को भी दूर करने वाला कहा गया है। पुराणों के अनुसार, इसी दिन गणेशजी का जन्म हुआ था। इस दिन तिलकुट चतुर्थी भी है। माना जाता है कि यह व्रत करने से कष्ट दूर होते हैं और मन्नतें पूरी होती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवतागण किसी कारणवश भगवान शिव के पास पहुंचे, तब महादेव के साथ कार्तिकेय और गणेशजी भी बैठे थे। किसी बात पर तब भगवान शिव ने कहा कि जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करेगा वह श्रेष्ठ कहलाएगा। कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल गए। गणेशजी सोचने लगे चूहे पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करने में बहुत समय लग जाएगा। गणेश अपने स्थान से उठे और माता-पिता की तीन बार परिक्रमा करके बैठ गए। शिवजी ने गणेश से पृथ्वी की परिक्रमा न करने का कारण पूछा। तब गणेश ने कहा ‘माता-पिता के चरणों में ही समस्त लोक हैं।’ यह सुनकर शिवजी ने गणेश को आशीर्वाद दिया कि चतुर्थी के दिन जो तुम्हारा पूजन करेगा और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देगा उसके तीनों ताप यानी दैहिक ताप, दैविक ताप तथा भौतिक ताप दूर होंगे। इस व्रत को करने से व्रतधारी के सभी तरह के दुख दूर होंगे और सुख-समृद्धि बढ़ेगी।

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