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रिटायर के बाद भाजपा में मिली बड़ी जिम्मेदारी!.. न्याय के देवताओं के फैसलों पर कैसे करें विश्वास?.. लोकतंत्र का सबसे बड़ा सवाल

उमन गुप्ता

लोकतंत्र में सबसे बड़ा सवाल क्या है, जो भाजपा को फायदा पहुंचाए भाजपा उसे फायदा पहुंचाकर फर्श से अर्स तक पहुंचा देती है। बात यहीं तक नहीं है, बड़े लोग बड़े फैसले का भाजपा ने इनाम भी दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायमूर्ति रंजन गोगोई १७ नवंबर २०१९ को रिटायर हुए। इससे पहले वे ९ नवंबर २०१९ को राम मंदिर पर पैâसला देकर गए। इसके ठीक ४ माह बाद यानी १६ मार्च २०२० को राज्यसभा के मनोनीत सदस्य बन गए। पूर्व न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर ४ फरवरी २०२३ को रिटायर हुए और १२ फरवरी २०२३ को उन्हें आंध्र प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया। नजीर राम मंदिर, नोटबंदी और ट्रिपल तलाक जैसे महत्वपूर्ण मामलों की संविधान पीठ का हिस्सा थे। पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय ने ५ मार्च २०२४ को कोलकाता हाई कोर्ट से इस्तीफा दिया। ७ मार्च को वे भाजपा में शामिल हो गए। बाद में गंगोपाध्याय को तमलुक लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया और २०२४ में लोकसभा चुनाव जीत कर संसद पहुंचे। १९८५ बैच के आईएएस अधिकारी अरुण गोयल ने १८ नवंबर २०२२ को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और उन्हें १९ नवंबर २०२२ को भारत का चुनाव आयुक्त नियुक्त कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इस नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल भी उठे। इसके बाद हरियाणा सरकार में उन्हें कैबिनेट रैंक की जिम्मेदारी दी गई। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के रिटायरमेंट के बाद उनकी संभावित नियुक्तियों पर बहस होती रही।
लोगों की आंखों में धूल झोंक रहा सिस्टम?
इसी तरह पूर्व न्यायाधीश अशोक भूषण राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (एनसीएलएटी) के अध्यक्ष नियुक्त किए गए। अब सवाल किसी एक व्यक्ति का नहीं है। सवाल सिस्टम का है। क्या किसी संवैधानिक पद पर रहते हुए लिए गए फैसलों पर जनता का भरोसा तब भी वैसा ही रहेगा, जब रिटायरमेंट के बाद सत्ता से जुड़ी नई जिम्मेदारियां मिल जाए।

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