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मीरा-भायंदर मनपा चुनाव : बागी उम्मीदवार बिगाड़ेंगे भाजपा का गणित! … लगेगी बीजेपी के वोट बैंक में सेंध

अमर झा / भायंदर
मीरा-भायंदर महानगरपालिका आम चुनाव के लिए सुसज्जित है। नामांकन वापसी के बाद कुल ४३५ उम्मीदवार चुनावी मैदान में बचे हैं। उम्मीदवारों के हिसाब से चुनावी समीकरण देखें तो बागियों के चुनाव मैदान में उतरने से सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को होता दिख रहा है।
ज्ञात हो कि मनपा चुनाव में भाजपा से टिकट पाने में असंतुष्ट उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा है, इसके फलस्वरूप कई बागी निर्दलीय उम्मीदवार बनकर चुनाव लड़ रहे हैं। अब कई वरिष्ठ पदाधिकारियों और पूर्व पार्षदों ने नरेंद्र मेहता की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निर्दलीय मोर्चा खोल दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये बागी उम्मीदवार भाजपा के ही वोट बैंक में सेंध लगाकर पार्टी का चुनावी गणित बिगाड़ सकते हैं।
बागी उम्मीदवारों ने ठोंकी ताल
प्रभाग १४ से बीजेपी के पूर्व नगरसेवक अनिल भोसले ने अपनी नाराजगी बरकरार रखी है। उनका कहना है कि २०१७ में भी उन्हें वादों के दम पर पीछे हटने को मजबूर किया गया था, लेकिन इस बार वे झुकने को तैयार नहीं हैं। प्रभाग २३ से विधायक नरेंद्र मेहता के करीबी संजय थरथरे को टिकट मिलने के बाद पूर्व नगरसेवक विनोद म्हात्रे ने ताल ठोंक दी है। प्रभाग १, ५ और ६ से बीजेपी की पूर्व नगरसेविका रीटा शाह, गौरांग कंसारा, भेरूलाल जैन, डॉ. प्रीति पाटील, सुनीता भोईर और शुभांगी कोटियन ने बगावत का झंडा बुलंद रखा है।
बीजेपी के लिए चिंता की स्थिति
प्रभाग १८ से बीजेपी के पूर्व नगरसेवक दौलत गजरे टिकट कटने के बाद अब निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं, साथ ही प्रभाग १९ से बीजेपी की रंजना कथावटे का विद्रोह अभी भी जारी है। बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति वार्ड २ और वार्ड ४ में बनी है, जहां बागियों ने एकजुट होकर अपना अलग पैनल तैयार कर लिया है। प्रभाग २ के पूर्व पार्षद दंपति यशवंत और मीना कांगणे के साथ शिखा और अभिषेक भाटेवाड़ा ने अपना स्वतंत्र पैनल बनाया है। इसके अलावा प्रभाग ४ के पूर्व नगरसेवक गणेश भोईर, प्रभात पाटील और उनके बेटे पीयूष ने भी मैदान में उतर कर निर्दलीय चुनाव लड़ने का पैâसला किया है।

 

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