मुख्यपृष्ठनए समाचारश्रम कानून के नाम पर मोदी सरकार फैला रही है भ्रम!

श्रम कानून के नाम पर मोदी सरकार फैला रही है भ्रम!

जयराम रमेश बोले- ४ कोड में री-पैकेज किया काग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए श्रम कानून को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस ने कहा है कि असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के वोट बैंक को लुभाने की कोशिश में नया श्रम कानून लाया गया है। केंद्र ने मौजूदा २९ श्रम-संबंधी कानूनों को फिर से पैक करके ४ कोड में बदल दिया गया है। कांग्रेस का कहना है कि केंद्र सरकार ने मौजूदा २९ श्रम-संबंधी कानूनों को इस तरह पेश किया है कि लोगों को ये नया लगे, जबकि ऐसा नहीं है। सरकार ने कुल मिलाकर भ्रम पैâलाने की कोशिश की है। श्रम-संबंधी कानूनों को लेकर नौकरीपेशा लोगों में भ्रम पैâल भी रहा है। लोग अभी तक इसे समझ नहीं पा रहे हैं। कांग्रेस इस मुद्दे को आने वाले शीतकालीन सत्र में जोर-शोर से उठाकर सरकार को घेरेगी।
कांग्रेस ने श्रम-संबंधी कानूनों को लेकर सरकार पर ५ सवाल दागे हैं। कांग्रेस ने पूछा है कि क्या ये कोड भारत के मजदूरों की श्रमिक न्याय की इन ५ बुनियादी मांगों को हकीकत बना पाएंगे? पार्टी के मुताबिक, मोदी सरकार को कर्नाटक और राजस्थान में कांग्रेस सरकारों से से सीखना चाहिए, जिन्होंने २१वीं सदी के श्रम सुधारों की दिशा में ऐतिहासिक कानून बनाए और ये कानून नए लेबर कोड लागू होने से पहले ही बन चुके थे।

कांग्रेस की केंद्र सरकार से ५ बुनियादी मांग
१. राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी ४०० रुपए प्रतिदिन, जिसमें मनरेगा भी शामिल हो।
२. स्वास्थ्य का अधिकार कानून, जिसके तहत २५ लाख रुपये का यूनिवर्सल स्वास्थ्य कवरेज मिले।
३. शहरी क्षेत्रों के लिए रोजगार गारंटी कानून।
४. सभी असंगठित श्रमिकों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा- जिसमें जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा भी शामिल हो।
५. सरकारी विभागों के कोर कार्यों में कॉन्ट्रैक्ट व्यवस्था को बंद करने की प्रतिबद्धता हो।

‘मौजूदा कानूनों को री-पैकेज किया’
कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘मजदूरी से जुड़े २९ मौजूदा कानूनों को ४ कोड में री-पैकेज किया गया है। इसे किसी क्रांतिकारी सुधार के तौर पर पेश किया जा रहा है, जबकि नियम अभी तक नोटिफाई भी नहीं हुए हैं, लेकिन सरकार से सवाल है कि क्या ये कोड भारत के मजदूरों की श्रमिक न्याय के लिए इन ५ जरूरी मांगों को हकीकत बना पाएंगे?’

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