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रोजगार देने में ‘मोदी राज’ फेल … देश में फूटा बेरोजगारी ‘बम’!

– अप्रैल से लगातार बढ़ रही है दर
– शहरी इलाकों में नौकरियों का टोटा
सामना संवाददाता / मुंबई
रोजगार देने के मोर्चे पर मोदी सरकार पूरी तरह से फेल हो गई है। शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर गत अप्रैल से बढ़ रही है। यह नौकरी निर्मित करने और लेबर फोर्स के बीच बढ़ते अंतर को दिखाती है। जानकारों का मानना है कि अमेरिका के ५० फीसदी टैरिफ के मामले को मोदी सरकार द्वारा अच्छी तरह से डील न कर पाने के कारण देश का ऐसा हाल हुआ है।
एमओएसपीआई (मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन) के जारी पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे डेटा के मुताबिक, शहरी इलाकों में बेरोजगारी दर अगस्त में ६.७ फीसदी से बढ़कर अक्टूबर में ७ फीसदी हो गई। सितंबर में यह ६.८ फीसदी थी। एमओएसपीआई के मंथली पीएलएफएस बुलेटिन में कुल बेरोजगारी में लगातार बढ़ोतरी दिखाई गई थी, जो इस साल अप्रैल में ६.५ फीसदी से बढ़कर जुलाई में ७.२ फीसदी हो गई थी।

महिलाओं में बेरोजगारी
की दर सबसे ज्यादा!
-अगस्त में ८.९ से बढ़कर अक्टूबर में ९.७ फीसदी हो गई

देश में बेरोजगारी की दर तेजी से बढ़ रही है। गत तीन महीने से शहरी बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है। शहरी महिला बेरोजगारी के मामले में स्थिति और भी खराब है। यह पिछले तीन महीनों में लगातार बढ़ी है। यह अगस्त में ८.९ फीसदी से बढ़कर अक्टूबर में ९.७ फीसदी हो गई।
जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए एमओएसपीआई के तिमाही बुलेटिन में भी बेरोजगारी में थोड़ी बढ़ोतरी का पता चला। सीडब्लूएस (करंट वीकली स्टेटस) अप्रोच के अनुसार, बेरोजगारी दर थोड़ी बढ़ी। पुरुषों के लिए ६.१ फीसदी से ६.२ फीसदी और महिलाओं के लिए ८.९ फीसदी से ९.० फीसदी हो गई। १५ से २९ साल के एज ग्रुप के लोगों के लिए बेरोजगारी दर में भी पहली तिमाही में १४.६ फीसदी से दूसरी तिमाही में १४.८ फीसदी तक थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई।
सीडब्ल्युएस अप्रोच सर्वे की तारीख से पहले के आखिरी सात दिनों के आधार पर किसी व्यक्ति की एक्टिविटी स्टेटस तय करता है। सीडब्लूएस अप्रोच के अनुसार, एक व्यक्ति को एक हफ्ते में बेरोजगार माना जाता था। अगर उसने रेफरेंस हफ्ते के दौरान किसी भी दिन १ घंटे भी काम नहीं किया, लेकिन उसी हफ्ते के दौरान किसी भी दिन कम से कम १ घंटे के लिए काम मांगा या काम के लिए उपलब्ध था। एक्सपर्ट्स ने इस बढ़ते ट्रेंड के लिए कई वजहों को जिम्मेदार ठहराया है, जिसमें अगस्त के आखिर से लागू हुए ५० फीसदी अमेरिकी टैरिफ, स्किल गैप और बढ़ते शहरीकरण के बीच नौकरी के मौकों की कमी शामिल है।

अमेरिकी टैरिफ का असर
ट्राईलीगल में पार्टनर-लेबर और एम्प्लॉयमेंट, अतुल गुप्ता ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी के पीछे कुछ वजहें हो सकती हैं। गुप्ता ने कहा, ‘रोजगार के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव कोई आम बात नहीं है, लेकिन मौजूदा माहौल में इसके कुछ कारण हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, जिन इंडस्ट्रीज पर अमेरिकी टैरिफ का असर पड़ रहा है, वे अपने विस्तार और हायरिंग प्लान को लेकर तब तक ज्यादा सावधानी बरत सकती हैं, जब तक कि मामला शांत न हो जाए और वे अपने रेवेन्यू पर टैरिफ के असर को पूरी तरह से समझ न लें।’

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