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अनुमति के फेर में करोड़ों की योजनाएं रफ्तार से दूर, अब दिसंबर तक एसटीपी पूरा करने का दावा

बाढ़ की आड़ में 186 करोड़ की परियोजना में देरी, इनटेक वेल के लिए एनएमसीजी की अनुमति का इंतजार

राजेश सरकार / प्रयागराज

यमुना से पानी उठाने के लिए प्रस्तावित इनटेक वेल्स का निर्माण अनुमति के फेर में अटका हुआ है। सिंचाई विभाग से हरी झंडी मिलने के बावजूद राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की अनुमति अब तक नहीं मिल सकी है। शनिवार को परियोजनाओं के निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने इस पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी को संबंधित विभागों से समन्वय कर लंबित अनुमति शीघ्र प्राप्त कराने और निर्माण शुरू कराने के निर्देश दिए।
इसी दौरान मंडलायुक्त ने प्रयागराज सीवरेज डिस्ट्रिक्ट-ए, नैनी के तहत करीब 186 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 50 एमएलडी क्षमता के नए एसटीपी का भी निरीक्षण किया। परियोजना की रफ्तार ने सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर दिए। इसे 3 जुलाई 2026 तक पूरा किया जाना था। समय-सीमा बीतने के बाद अब दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने का नया लक्ष्य तय किया गया है।
परियोजना प्रबंधक सुरेंद्र सिंह परमार ने पिछले वर्ष आई भीषण बाढ़ को देरी की वजह बताया। उनका कहना था कि पूरा परियोजना क्षेत्र बाढ़ के पानी में डूब गया था, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हुआ। हालांकि, करोड़ों की परियोजना में तय समय-सीमा चूकने के बाद अब दिसंबर की नई समय-सीमा पर काम पूरा कराने की चुनौती खड़ी है।
सीवेज के बोझ से मिलेगी राहत
एसटीपी के चालू होने के बाद स्लज वाटर का उपचार कर 30 बीओडी से कम मानक वाला पानी एनजीटी के निर्धारित मानकों के अनुरूप डिस्चार्ज किया जाएगा। इससे प्रयागराज के दूसरे एसटीपी पर पड़ रहे अतिरिक्त भार को कम करने में मदद मिलेगी।
मंडलायुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि दोनों परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। अब देखना यह है कि अनुमति के इंतजार में अटकी इनटेक वेल्स और समय-सीमा से पिछड़ चुका 186 करोड़ रुपये का एसटीपी दिसंबर तक सचमुच पटरी पर लौटता है या फिर नई तारीख का बहाना सामने आता है।

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