द्रुप्ति झा / मुंबई
मंगलवार दोपहर को अचानक बोरीवली-पश्चिम के चंदावरकर रोड स्थित एक गीता मंदिर इमारत की पहली मंजिला का स्लैब अचानक गिर पड़ा। इस हादसे में एक बुजुर्ग व्यक्ति घायल हो गया और एक महिला के पैर में चोट आ गई, जिसे ताबड़तोड़ अस्पताल ले जाया गया। स्थानीयों के अनुसार, इमारत चार मंजिला की थी, जिसमें 200 के आस-पास लोग रह रहे थे। इमारत 52 साल पुरानी है, जो कि पूरी तरीके से कमजोर हो गई थी। बारिश में पहले से ही इमारत गिरने का खतरा बना हुआ था। इसके बावजूद इस खतरे को देखते हुए मनपा ने इस इमारत को खतरनाक घोषित नहीं किया, जिस वजह से ये हादसा हुआ। हालांकि, हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ और एंबुलेंस की टीम मौके पर पहुंच गई और बचाव अभियान शुरू कर दिया।
इस हादसे के बाद मनपा ने उस इमारत में रह रहे लोगों से घर खाली करवाया और लोग अपने रिलेटिव के यहां शिफ्ट होने को मजबूर हो चुके हैं। लेकिन सवाल उठता है कि जब इमारत 52 साल पुरानी थी और जर्जर की स्थिति में थी तो मनपा ने इसे खतरनाक इमारत में क्यों नहीं घोषित किया। अगर ये हादसे होने से पहले मानपा ने कोई ठोस कदम उठाया होता तो ये हादसा नहीं होता।
सोशल वर्कर शिवा शेट्टी ने कहा कि मानपा की ये लापरवाही है। पहले ऐसी इमारतों का सर्वे नहीं करती है और हादसा होने बाद ही उनकी आंखे खुलती है। इमारत की पहली मंजिल का स्लैब गिरने के बाद मनपा अधिकारी ने खतरनाक बिल्डिंग का बोर्ड लगाया, जो कि मनपा अधिकारी को ये काम पहले ही कर लेना था।
स्थानीय लोगों ने कहा कि हम ऐसे जर्जर स्थिति में रहने को मजबूर हो चुके थे रहने को, बारिश के समय में हमे तो बहुत ही डर लगता था इमारत गिरने का। हमने कई बार मनपा को इसकी जानकारी भी दी थी, लेकिन इस पर मनपा ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
