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मुस्लिम वर्ल्ड : मशहद में दफन, गाजा में नमाज!.. खामेनेई के लिए फिलिस्तीनियों ने क्या किया?

सूफी खान

आज गाजा भले ही तबाह-ओबर्बाद है लेकिन वो भी ईरान के रहबर को याद कर रहा है। जी हां, वो गजा, जिसका दो साल तक दुनिया में कोई पुरसाने हाल नहीं था, सिवाय ईरान के। वो अयातुल्लाह खामेनेई ही थे, जिन्होंने गाजा की आवाज को बुलंद रखा। जब ताकतवर और अमीर अरब देशों ने दुनिया के इस खित्ते से मुंह फेर लिया, तब भी ८६ साल का बुजुर्ग खड़ा रहा गाजा वालों के साथ।
इमाम खामेनेई अब दुनिया में नहीं रहे, उनकी तदफीन हो चुकी है उन्हें मशहद में सुपुर्द ए खाक कर दिया गया। लेकिन टूटे फूटे गाजा में रविवार को हलचल थी। इमाम अयातुल्लाह अली खामेनेई के हाथ वाला बैनर और शामियाना जिसमें महिलाएं और पुरुष। सवाल उठा रहे थे कि आखिर गाजा में क्या हो रहा है। दरअसल, गाजा में इमाम हजरत अयातुल्लाह इमाम सैय्यद अली हुसैनी खामेनेई की नमाज ए जनाजा थी। आप सोचेंगे कि उनकी जनाजे की नमाज तो मशहद में हुई थी, जहां उन्हें दफ्न भी कर दिया गया। मगर ये भी खामेनेई साहब की नमाज-ए-जनाजा हुई। गाजा वाले इमाम खामेनेई की गायबाना नमाज-ए-जनाजा अदा कर रहे थे। गायबाना नमाज-ए-जनाजा को अरबी में ‘सलात अल-गाइब’ भी कहा जाता है। यह एक ऐसी इस्लामी प्रार्थना है, जो किसी दुनिया से गुजर चुके मुस्लिम शख्स के लिए उसके पार्थिव शरीर की गैरमौजूदगी में पढ़ी जाती है। गायबाना नमाज-ए-जनाजा तब पढ़ी जाती है, जब किसी मुसलमान की मौत विदेश या दूर हो गई हो। कहा जाता है कि पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) ने हब्शा के राजा ‘नज्जाशी’ के इंतकाल के बाद मदीना में उनकी मैय्यत की गैरमौजूदगी में गायबाना नमाज-ए-जनाजा पढ़ी थी। जबकि बादशाह का इंतेकाल उनके देश हब्शा में हुआ था।
ईरान के सुप्रीम लीडर रहते हुए सैय्यद अयातुल्लाह अली खामेनेई फिलिस्तीन और गाजा को लेकर पूरी तरह से एक्सिस ऑफ रजिस्टेंस के हिमायती रहे। उन्होंने इजरायल के वजूद को कभी नही माना। खामेनेई खुलकर इजरायल के अस्तित्व को मिटाने की वकालत करते थे। उन्होंने गाजा में हमास और अन्य फिलिस्तीनी समूहों को ईरान की ओर से सियासी, मॉरल और फाइनेंशियल सपोर्ट किया। इमाम खामेनेई बार-बार इस्लामिक देशों से आग्रह करते थे कि वे इजरायल के साथ सभी राजनयिक संबंध और व्यापार खत्म करें ताकि इजरायल पर आर्थिक दबाव बनाया जा सके। गाजा में इजरायल की आक्रामता के खिलाफ ईरान ने दो बार इजरायल पर हमला किया था। इसके अलावा हिजबुल्लाह और हूती भी इजरायल पर लगातार हमलावर रहे। यही वजह है कि गाजा वाले भी अपने रहबर को याद कर रहे थे। खामेनेई का पार्थिव शरीर न होने के बावजूद गाजा के लोगों ने अपने सबसे बड़े सपोर्टर ईरान के सुप्रीम लीडर को गायबाना जनाजे की नमाज अदा करके याद किया।

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