मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड : ईरान कुछ बड़ा करेगा!.. सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा?

मुस्लिम वर्ल्ड : ईरान कुछ बड़ा करेगा!.. सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा?

 सूफी खान

ईरान परमाणु बम बनाने जा रहा है? पश्चिमी देशों में इसे लेकर खलबली मची हुई है। दरअसल, कुछ सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिल रहे हैं कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर पुनर्निर्माण की गतिविधियां तेज हो गई हैं। तेहरान के पास भी तेजी से निर्माण कार्य चल रहा है। इसके अलावा, कूह-ए-कोलांग गजला, जिसे ‘पिकऐक्स माउंटेन’ भी कहा जाता है, उसके आसपास भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। यह पहाड़ मध्य ईरान के इस्फहान प्रांत में नतांज परमाणु परिसर से महज १.५ से २ किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी अपने बयानों में एक-दो बार पिकऐक्स माउंटेन का जिक्र कर चुके हैं।
लेकिन जब भी ईरान के परमाणु बम बनाने की चर्चा तेज होती है, तब सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के उस फतवे का भी जिक्र शुरू हो जाता है, जिसमें कहा गया है कि इस्लामी नजरिए से मानवता का विनाश करने वाला परमाणु बम हराम है। पहले यह फतवा ईरान के पहले सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह खुमैनी ने दिया था। बाद में आयतुल्लाह खामेनेई ने भी इसे बरकरार रखा। लेकिन मौजूदा सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने अभी इस पर खामोशी अख्तियार कर रखी है। इसके चलते चर्चा गर्म है कि आखिर मोजतबा खामेनेई इस फतवे को आगे क्यों नहीं बढ़ा रहे हैं। ईरान के भीतर एक बड़ा तबका ऐसा भी है, जो मानता है कि इस तरह के फतवे से ईरान के हाथ बंध रहे हैं। वहां कई लोग मानते हैं कि अगर इस्लामी नजरिए का पालन करना ही है, तो ईरान को परमाणु बम बना लेना चाहिए, लेकिन यह भी स्पष्ट कर देना चाहिए कि वह इसका पहले इस्तेमाल कभी नहीं करेगा। दरअसल, ईरान में यह बहस फिर शुरू हो गई है कि वह ऐसे क्षेत्र में है, जहां उसके सबसे बड़े दुश्मन इजरायल के पास परमाणु हथियार हैं। वहीं इस क्षेत्र में अमेरिका का भी व्यापक दखल है। ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या के बाद वहां अपनी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान को अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु शक्ति बन जाना चाहिए? पश्चिमी देशों के कुछ विश्लेषकों को भी चिंता है कि कहीं ऐसा न हो कि ईरान पर परमाणु बम बनाने के लगातार लगते आरोपों के बीच वह वास्तव में यह कदम उठा ले। खबर है कि ईरान के करीब ३२ सांसदों और प्रभावशाली नेताओं ने जो पिछली सरकारों में भी अहम पदों पर रह चुके हैं, ईरानी संसद को एक पत्र लिखा है। इसमें मांग की गई है कि संसद में एक आपात विधेयक पेश किया जाए, जिसके तहत ईरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से बाहर निकल जाए। इस संधि का उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है। पत्र में इन ३२ प्रभावशाली लोगों ने यह भी कहा है कि जो भी रास्ता चुना जाए, वह सबसे तेज होना चाहिए, ताकि ईरान जल्द से जल्द एनपीटी से बाहर निकल सके।
अब देखना होगा कि ईरानी संसद इस पर क्या रुख अपनाती है। क्या ईरान अपने सहयोगियों रूस और चीन को विश्वास में लेकर परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई बड़ा कदम उठा चुका है? यह सवाल अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनता है।

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