मुख्यपृष्ठनए समाचारपटना की पॉलिटिक्स...तस्वीर छोटी, विधायक का गुस्सा बड़ा!

पटना की पॉलिटिक्स…तस्वीर छोटी, विधायक का गुस्सा बड़ा!

अरुण कुमार गुप्ता

जिस मंच से एनडीए को एकजुटता का संदेश देना था, वहीं जदयू की विधायक विभा देवी की नाराजगी ने राजनीतिक चर्चा छेड़ दी। मामला न किसी बड़े नीतिगत विवाद का था, न किसी चुनावी घोषणा का, बल्कि बैनर-पोस्टर पर तस्वीर के आकार और मंच पर कुर्सी की व्यवस्था का था। लेकिन विधायक ने सार्वजनिक मंच से ही अपनी नाराजगी जाहिर कर दी। अब सवाल है कि चुनावी अभियान में नेताओं के सम्मान और संगठनात्मक तालमेल को लेकर ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई? १३ अक्टूबर को नवादा के गांधी स्कूल मैदान में बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए एनडीए की सभा आयोजित की गई थी। इसमें पटना स्नातक सीट से जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार और पटना शिक्षक सीट से भाजपा उम्मीदवार नवल किशोर यादव के समर्थन में प्रचार किया गया। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी समेत कई नेता मौजूद थे। रिपोर्टों के मुताबिक, नवादा की जदयू विधायक विभा देवी बैनर-पोस्टर पर अपनी तस्वीर छोटी होने और मंच पर पीछे की पंक्ति में कुर्सी लगाए जाने से नाराज हो गर्इं। उन्होंने जदयू के जिलाध्यक्ष राजकिशोर दांगी और कार्यक्रम संयोजक को सबके सामने फटकार लगाई। बाद में उनकी कुर्सी आगे की पंक्ति में लगाए जाने के बाद मामला शांत हुआ।
कुर्सी पर कुशवाहा, पार्टी में बगावत!
बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के भीतर घमासान तेज हो गया है। पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने प्रदेश महासचिव रामपुकार सिन्हा को छह साल के लिए निलंबित किया तो अब तीन विधायकों ने नेतृत्व के पैâसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला अब सिर्फ एक नेता के निलंबन तक सीमित नहीं, बल्कि पार्टी में नेतृत्व, कार्यकर्ताओं के सम्मान और असहमति की जगह को लेकर बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है। विवाद के केंद्र में रालोमो के तीन विधायक आलोक सिंह, माधव आनंद और रामेश्वर महतो हैं। तीनों रामपुकार सिन्हा के नामांकन के समय उनके साथ मौजूद थे। सिन्हा सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने इस सीट पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के आनंद पुष्कर को उम्मीदवार बनाया है। १३ अक्टूबर को विधायक रामेश्वर महतो ने उपेंद्र कुशवाहा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर रामपुकार सिन्हा का समर्थन करने के कारण कार्रवाई करनी है, तो तीनों विधायकों और उनके साथ खड़े कार्यकर्ताओं पर भी कार्रवाई की जाए। महतो का कहना था कि कुशवाहा को सिन्हा को निलंबित करने से पहले उनसे बातचीत करनी चाहिए थी।
अपनों ने ही बिगाड़ा चुनावी खेल!
बिहार में विधान परिषद चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर की खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। एक तरफ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और गठबंधन के नेता संयुक्त चुनाव प्रचार की रणनीति बना रहे हैं, तो दूसरी तरफ सहयोगी दलों के नेता और विधायक अपने ही गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवारों के समर्थन से अलग राह पकड़ते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या एनडीए की एकजुटता के दावों के बीच अंदरूनी असंतोष चुनावी चुनौती बन रहा है? राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के प्रदेश महासचिव रामपुकार सिन्हा ने सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन किया। इस सीट पर एनडीए ने जदयू के आनंद पुष्कर को समर्थन दिया है। सिन्हा के समर्थन में रालोमो के तीन विधायक माधव आनंद, रमेश्वर महतो और आलोक कुमार सिंह सामने आए। इसके बाद उपेंद्र कुशवाहा ने सिन्हा को छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जदयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार और विधायक अनंत सिंह के बीच मतभेद भी चर्चा में हैं।

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