सूफी खान
हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच जंग अब तय लगने लगी है। पिछले साल हुआ सीजफायर कभी भी टूट सकता है। इजरायल ने वो गलती कर दी है, जिसने हिजबुल्लाह को बुरी तरह भड़का दिया है। हिजबुल्लाह की तरफ से बयान भी आ गया है कि इजरायल ने रेड लाइन क्रॉस कर ली है। यानी गाजा के बाद अब इजरायल और साउथ लेबनान की सरहद पर जंग के बादल मंडराने लगे हैं। इसकी वजह भी है २३ नवंबर को इजरायल ने सीजफायर के बावजूद लेबनान की राजधानी बेरूत पर जबरदस्त बमबारी कर दी। निशाने पर था हिजबुल्लाह का चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ हेथम अली तबातबाई। जो इजरायल के इस हमले में मारा गया। ये हिजबुल्लाह चीफ रहे सैयद हसन नसरुल्लाह की मौत के बाद हिजबुल्लाह को दूसरा सबसे बड़ा नुकसान है। हिजबुल्लाह आर्मी चीफ हेथम अली तबातबाई के अलावा ५ और लोगों की मौत इस हमले में हुई है। इसके अलावा २८ लोग गंभीर तौर पर जख्मी हो गए हैं। इस हमले के बाद इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के दफ्तर से बयान भी आ गया है जिसमें कहा गया है कि हेथम अली तबातबाई इजरायली हमले का मेन टारगेट था। तबातबाई हिजबुल्लाह में एक बड़ा नाम था,१९६८ में पैदा हुए तबातबाई ने महज १२ साल की उम्र में लेबनान की तंजीम हिजबुल्लाह ज्वाइन की थी। जो मस्जिद ए अक्सा की आजादी और साउथ लेबनान में इजरायल की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ लड़ने का दावा करती है।
तबातबाई को हिजबुल्लाह का असली चीफ ऑफ स्टाफ माना जाता था। वो संगठन में सबसे सीनियर मिलिट्री रणनीतिकारों में से एक था। टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, तबातबाई का जन्म १९६८ में बेरूत में ही हुआ था। उसकी मां दक्षिणी लेबनान की और पिता ईरानी थे। तबातबाई की परवरिश दक्षिण लेबनान में ही हुई थी। अमेरिका ने साल २०१६ से उसे मोस्ट वॉन्टेड टेररिस्ट की लिस्ट में रखा था। २०१८ में अमेरिका ने तबातबाई के बारे में कोई भी जानकारी देने पर ५० लाख डॉलर का इनाम भी घोषित किया था।
हसन नसरुल्लाह की मौत के बाद से ये हिजबुल्लाह का दूसरा सबसे बड़ा नुकसान है। उधर इजरायल और अमेरिका और अरब मुल्क लेबनान सरकार पर हथियार डालने का प्रेशर बनाए हुए हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि ऐसे में मुमकिन है कि हिजबुल्लाह भी इजरायल पर हाथ छोड़ दे और पूरी तरह जंग में उतर आए। साउथ लेबनान का सबसे ताकतवर संगठन हिजबुल्लाह आरोप लगाता रहा है कि सीजफायर के बावजूद इजरायल पिछले एक साल से लगातार हमलों को अंजाम दे रहा है। कहा जा रहा है कि गाजा में हमास के साथ सीजफायर होने के बावजूद वहां भी इजरायली हमले जारी हैं और फिलिस्तीनियों की मौत हो रही है,उसी तरह लेबनान में भी हिजबुल्लाह के साथ सीजफायर के बावजूद इजरायल ने टॉप कमांडर को मारकर एक बार फिर जंग का महाज खोल दिया है।
अब देखना होगा कि अपने चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ की मौत का बदला हिजबुल्लाह किस तरह से लेता है। वैसे भी हिजबुल्लाह चीफ नईम कासिम साफ कह चुके हैं कि उनका संगठन हथियार नहीं डालेगा, और इसके लिए वो किसी भी जंग को तैयार हैं। मीडिया रिपोर्ट बताती हैं कि सैयद हसन नसरुल्लाह की मौत के एक साल के अंदर ही हिजबुल्लाह ने साउथ लेबनान में एक बार फिर खुद को मजबूत कर लिया है। आरोप लगता है कि इसके लिए ईरान ने उसकी मदद की है।
