सूफी खान
मिडिल ईस्ट में जंग की घड़ी टिक-टिक शुरू हो गई है। कभी भी ईरान पर बड़ा हमला हो सकता है, या फिर ईरान यूएई पर प्रिवेन्टिव अटैक कर सकता है। पीएम नेतन्याहू ने भी सोमवार को इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। कहा जा रहा है कि महायुद्ध पार्ट-२ कभी भी शुरू हो सकता है। वेस्ट एशिया में गहराते युद्ध के हालात और नाजुक युद्धविराम के बीच अचानक एक बड़ी कूटनीतिक हलचल शुरू हो गई है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को एक अघोषित और अत्यंत महत्वपूर्ण दौरे पर ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे। कूटनीतिक सूत्रों और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस अचानक दौरे के पीछे असल एजेंडा किसी भी तरह से हालात को संभालने के लिए शांति की आखिरी कोशिश बताया जा रहा है।
तेहरान पहुंचते ही नकवी ने न केवल ईरानी गृह मंत्री से मुलाकात की, बल्कि उन्होंने ईरानी प्रेसिडेंट मसूद पेजेश्कियान के साथ करीब ९० मिनट की एक बेहद महत्वपूर्ण और निजी बैठक की। इस बैठक में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी मौजूद थे। इसके अलावा, नकवी ने ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर गालिबफ से भी मुलाकात की, जिन्होंने कुछ समय पहले इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ बातचीत का नेतृत्व किया था। लेकिन ईरान के लिए निकलने से पहले पाकिस्तानी गृहमंत्री अमेरिकी राजदूत के संपर्क में थे। पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व की कोशिश इस समय केवल इतनी है कि यह नाजुक युद्धविराम टिका रहे और दोनों देश बातचीत की टेबल से पूरी तरह न उठें, क्योंकि संवाद ठप होने का सीधा मतलब पश्चिम एशिया में एक और भीषण युद्ध की शुरुआत होगा।
हालांकि, पाकिस्तानी गृहमंत्री के मुलाकात के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियान ने हालात के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया। इस बीच खबर ये भी आई कि इजरायल ने इराक में दो सीक्रेट बेस भी बनाए हैं। ये इराक का पश्चिमी इलाका है। इराक से ईरान पर हमला करना आसान होता है, एक्सपर्ट कह रहे हैं कि अगर अमेरिका ईरान की धरती पर उतरना चाह रहा है तो वो इराक की तरफ से ही मुमकिन हो सकता है।
ईरान अमेरिका की शर्तों को एकतरफा और अनुचित मान रहा है। ईरानी विदेश मंत्री का कहना है कि अमेरिका बिना कोई ठोस रियायत दिए ईरान से वो सब हासिल करना चाहता है, जो वह युद्ध के मैदान में हासिल नहीं कर पाया। देखा जाए तो ईरान अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहा पाकिस्तान इस जंग को रुकवाने की आखिरी कोशिश करता दिख रहा है। पाकिस्तानी गृह मंत्री का ईरान पहुंचना इसी कवायद का हिस्सा है। लेकिन एक्सपर्ट कहते हैं कि अब शायद ही पाकिस्तान इस युद्ध को रोक पाए। जिस तरह के हालात बन रहे हैं वो इशारा करते हैं कि मिडिल ईस्ट में फिर कुछ बड़ा होगा।
