सूफी खान
अमेरिका के जरिए वेनेजुएला पर हमला करने और प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो को परिवार सहित उठाकर अमेरिका ले जाने को लेकर अमेरिका का विरोधी खेमा आक्रामक है। ईरान, नार्थ कोरिया, चीन और लेटिन अमेरिका के कई देशों ने खुलकर अमेरिका की इस कार्रवाई का विरोध किया है। उत्तर कोरिया के लीडर किम जोंग उन ने तो अमेरिका की वेनेजुएला में हुई इस हरकत के दूसरे ही दिन एक ताकतवर मिसाइल का परीक्षण करके अपना क्लीयर संदेश दे दिया।
दरअसल, वेनेजुएला के बाद से ये चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका इसी तरह की कार्रवाई क्या नॉर्थ कोरिया पर भी करेगा, लेकिन नॉर्थ कोरिया ने ये पैगाम दे दिया है कि वो वेनेजुएला नहीं है। दरअसल, चर्चा ये भी चल पड़ी है कि अमेरिका उन दुश्मन देशों पर हाथ नहीं डालता, जिनके पास किसी न किसी रूप में न्यूक्लियर हथियार हैं या अमेरिका की इस तरह की कार्रवाइयों से निपटने के लिए न्यूक्लियर पावर का होना जरूरी है, वरना वेनेजुएला जैसा हाल हो जाएगा। वेनेजुएला पर हुए अमेरिका के आक्रमण की निंदा करते हुए किम जोंग उन के प्रशासन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों और एक संप्रभु देश की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया। प्योंगयांग ने कहा कि यह कदम साम्राज्यवादी अमेरिका के कब्जा करने की आदत और क्रूर स्वभाव को दर्शाता है। हालांकि, ताकतवर मिसाइल टेस्ट के जरिए उत्तर कोरिया ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं।
अगर अमेरिका, वेनेजुएला जैसा कोई अभियान उत्तर कोरिया के साथ करने की सोचता है, तो ऐसी स्थिति के लिए वह दिखाना चाहता था कि उसकी तरफ से जबरदस्त प्रतिरोध होगा। एक्सपर्ट कहते हैं कि यही वजह है कि ईरान न्यूक्लियर ताकत हासिल करने की कोशिश करता है, जो अमेरिका को चुभता है, क्योंकि ईरान अच्छी तरह से जानता है कि इजरायल की आक्रामकता और अमेरिका के मिडिल ईस्ट में दखल से अगर निपटना है तो न्यूक्लियर पावर का होना जरूरी है, वरना वेनेजुएला की मिसाल सबके सामने है। ईरान भले ही साफ कहता रहा है कि उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम शांति पूर्ण और एनर्जी उद्देश्यों के लिए है। इसके बावजूद उसके न्यूक्लियर सेंटर्स पर अमेरिका ने हमला किया। इतना ही नहीं, अब ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को लेकर धमकियां दी जा रही हैं।
लेकिन जानकार कहते हैं कि ईरान वेनेजुएला नहीं है, उस पर हाथ डालने से पहले अमेरिका को सौ बार सोचना पड़ेगा। फिर भी अगर इजरायल के उकसावे पर अमेरिका कोई कार्रवाई करेगा तो ईरान की प्रतिक्रिया भयानक हो सकती है। लेकिन वेनेजुएला की घटना और किम जोंग उन के साथ ही ईरान का रिएक्शन बता रहा है कि ये देश अमेरिका की मनमानी से निपटने के लिए बरसों से तैयार हैं और इन देशों पर निगाह डालना अमेरिका के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।
