सूफी खान
हूती खुश, जोरदार जश्न मनाया
‘सऊदी अरब से बदला लो, सऊदी अरब को बख्शेंगे नही’… इसी तरह के नारों के साथ यमन में जबरदस्त जश्न का माहौल है। यमन के अंसारुल्लाह है, जिन्हें हूती भी कहा जाता है, अपने कंट्रोल वाले यमन की आर्म फोर्सेस के जरिए समुद्र में सऊदी को पूरी तरह से बैन किए जाने के पैâसले से बेहद खुश हैं। राजधानी सना में जोरदार आतिशबाजी करके अंसारुल्लाह ने अपनी खुशी का इजहार किया और खूब झूमे।
दरअसल, २० जुलाई को ईरान हिमायती यमन के अंसारुल्लाह और उनकी फौज ने सऊदी अरब के खिलाफ पूरी तरह समुद्री नाकेबंदी करने का एलान कर दिया है। यमन में हूती आर्म फोर्सेस के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने साफ कह दिया कि नाकेबंदी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। उन्होंने इसे ‘आंख के बदले आंख’ की नीति के तहत उठाया गया कदम बताया गया है। उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि सऊदी अरब की किसी भी ‘बेवकूफी भरी हरकत’ का जवाब ‘पूरी और निर्णायक कार्रवाई’ से दिया जाएगा।
पिछले दिनों ईरान में इमाम आयतुल्ला अली खामेनेई के जनाजे से यमन लौट रहे अंसारुल्लाह के एक डेलिगेशन को सऊदी अरब ने मिसाइल से निशाना बनाया था। सऊदी की दलील थी कि हूती ईरान की महान एयरलाइंस के प्लेन से यमन के उस एयररूट पर वैâसे दाखिल हुए, जबकि उस एयर रूट पर ईरान के प्लेन लाने और उतारने पर सेंशन्स लगे हैं। हालांकि, हूतियों का डेलिगेशन बच गया उसके बाद उन्होने महान एयर का प्लेन राजधानी सना में न उतारकर होदीदाह एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया था। लेकिन तब से सऊदी पर अंसारुल्लाह ने ताबड़तोड़ हमले अंजाम दिए और वहां के आभा एयरपोर्ट को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया। सऊदी अरब यमन के दूसरे हिस्से से चल रही अब्दुर्ररब मंसूर हादी ग्रुप की सरकार को समर्थन करता है। अब जब यमन की सरकार अंसारुल्लाह सरकार ने सऊदी के जहाजों और किसी भी गतिविधि के लिए यमन के आसपास लाल सागर का समुद्र पूरी तरह पैक कर दिया है तो राजधानी सना में जश्न का आलम था।
इधर, हूतियों के नाकेबंदी के एलान से पाकिस्तान की टेंशन बढ़ गई है। दरअसल, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच मौजूद रक्षा सहयोग समझौते के अनुसार, सऊदी अरब पर किसी भी बड़े हमले को पाकिस्तान पर हमला माना जाएगा। अब अंसारुल्लाह ने सीधी चुनौती देकर सऊदी का रास्ता ही ब्लॉक कर दिया है… ऐसे में अगर सऊदी अरब आधिकारिक रूप से मदद की मांग करता है तो पाकिस्तान को अपनी सैन्य टुकड़ियों को तैनात करना पड़ सकता है, जो क्षेत्रीय स्तर पर एक बड़ा संघर्ष पैदा कर सकता है। पाकिस्तान के लिए स्थिति और जटिल इसलिए है क्योंकि हूती विद्रोही ईरान के करीबी माने जाते हैं और ईरान की मंजूरी के बिना ऐसे बड़े कदम शायद ही उठाए जाते हैं। पाकिस्तानी जनता में ईरान के प्रति गहरी सहानुभूति है। पाकिस्तान के आम नागरिक अमेरिका और इजरायल की नीतियों का खुलकर विरोध करते हैं।
