सूफी खान
दुनिया भर में एनर्जी को लेकर संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद प्राकृतिक गैस की बढ़ती मांग के बीच मिस्र और तुर्की ने एक के बाद एक बड़ी सफलता हासिल की है। मिस्र ने अपने पश्चिमी रेगिस्तान में एक नया गैस भंडार खोजा है, जबकि तुर्की ने इस साल की कुल खोजों का एलान किया है, जो ९२.४ अरब क्यूबिक मीटर गैस के बराबर है। ये खोजें न केवल दोनों देशों की ऊर्जा स्वतंत्रता को मजबूत करेंगी, बल्कि उनकी अर्थव्यवस्थाओं को अरबों डॉलर का फायदा पहुंचाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ये विकास भूमध्य सागर और काला सागर इलाके में एनर्जी के क्षेत्र में नई ऊंचाई दे देंगे।
मिस्र के पेट्रोलियम और खनिज संसाधन मंत्रालय ने पिछले दिनों एक महत्वपूर्ण घोषणा की। मंत्रालय के अनुसार, पश्चिमी रेगिस्तान के बद्र-१५ इलाके में बद्र अल दीन पेट्रोलियम कंपनी द्वारा खोजा गया नया गैस भंडार देश की ऊर्जा जरूरतों को नई ताकत देगा। इस कुएं से प्रतिदिन १६ मिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस और ७५० बैरल कंडेनसेट का उत्पादन संभव है। यह खोज मिस्र के गैस भंडारों में लगभग १५ अरब क्यूबिक फीट गैस जोड़ देगी, जिसका बाजार मूल्य अरबों डॉलर में है।
मिस्र या इजिप्ट को अप्रâीका का सबसे बड़ा गैस निर्यातक माना जाता है। लेकिन आर्थिक चुनौतियों और इजरायल से आयात पर निर्भरता के बीच यह नई खोज राहत की सांस है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे मिस्र का गैस उत्पादन २०२५ में ७.५ अरब क्यूबिक मीटर से बढ़कर २०३० तक १० अरब क्यूबिक मीटर हो सकता है, जो जीडीपी में १-२ प्रतिशत का इजाफा लाएगा। मिस्र के एलान के एक दिन पहले तुर्की ने अपनी इस साल की ऊर्जा उपलब्धियों का खुलासा किया। ऊर्जा मंत्री अल्पार्सलान बैरख्तर ने बताया कि २०२५ में तुर्की पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन द्वारा कुल ९२.४ अरब क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस के भंडार खोजे गए हैं, जिनका बाजार मूल्य लगभग ३७ अरब डॉलर है। इसमें सबसे बड़ा गैस भंडार मई २०२५ में ब्लैक सी या काला सागर में ३,५०० मीटर की गहराई पर खोजा गया। तुर्की के प्रेसिडेंट रजब तैय्यब एर्दोगान ने इसे ‘मील का पत्थर’ करार दिया। उन्होंने कहा, यह खोज तुर्की के घरों को ३-४ साल तक गैस उपलब्ध करा सकती है। ये दोनों खोजें वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक बड़ा संकेत हैं। यूरोप में गैस की कीमतें अभी भी ऊंची हैं और मिस्र-तुर्की जैसे देश वैकल्पिक स्रोत के रूप में उभर रहे हैं। मिस्र एलएनजी का निर्यात बढ़ा सकता है, जबकि तुर्की काला सागर गलियारे को मजबूत करेगा। लेकिन चुनौतियां भी हैं – उत्पादन शुरू होने में २-३ साल लगेंगे और पर्यावरणीय प्रभाव जैसे ड्रिलिंग से प्रदूषण एक बड़ी चुनौती बनेगा।
आर्थिक रूप से मिस्र को विदेशी मुद्रा का नया स्रोत मिलेगा, जबकि तुर्की की मुद्रास्फीति पर नियंत्रण आएगा। दोनों देशों में हजारों नौकरियां पैदा होंगी और बुनियादी ढांचे का विकास होगा। गौरतलब है कि मिस्र और तुर्की अरब खित्ते में मजबूत फौजें रखनेवाले देश हैं। मिस्र इजरायल का पड़ोसी है। उसके इजरायल से अच्छे संबंध रहे हैं, जबकि तुर्की नाटो मुल्क है और एक प्रोफेशनल फोर्स रखता है। ऐसे में इन दोनों देशों की माली हालत या आर्थिक स्थिति का मजबूत होना इजरायल के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।
