मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड: खाड़ी का खेल पलटने की तैयारी में ट्रंप!

मुस्लिम वर्ल्ड: खाड़ी का खेल पलटने की तैयारी में ट्रंप!

सूफी खान

क्या सऊदी को दे दी न्यूक्लियर बम की छूट?

ईरान बार-बार कहता है कि हमारे यहां न्यूक्लियर बम बनाना हराम है और वो इसे कभी नहीं बनाएगा। लेकिन अमेरिका और इजरायल ने उस पर न्यूक्लियर बम बनाने का आरोप लगाकर जंग थोपी। जिसे ४० दिनों तक ईरान ने लड़ा भी। अब ईरान पर इल्जाम लगाने वाले अमेरिका ने अरब रीजन के एक और देश सऊदी अरब के साथ न्यूक्लियर डील कर ली है। २२ जुलाई को ट्रंप ने सऊदी के साथ न्यूक्लियर समझौते को मंजूरी दे दी। अरबों डॉलर का ये न्यूक्लियर समझौता अगले ३० सालों के लिए लागू हुआ है।
एक्सपर्ट कहते हैं कि डील में कड़े सुरक्षा नियम न होने का पूरा खतरा है कि आने वाले वक्त में सऊदी अरब इस तकनीक का इस्तेमाल न्यूक्लियर हथियार बनाने में कर सकता है। आशंका यह भी है कि डील का असली मकसद ही यही है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पूर्व में खुलेआम कह चुके हैं कि अगर ईरान परमाणु बम बनाता है, तो सऊदी भी बिना किसी देरी के अपना परमाणु हथियार तैयार करेगा। सऊदी-अमेरिका समझौते के तहत अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब में न्यूक्लियर बनाने में मदद करेंगी। अब इस पैâसले ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका ने इस डील में सऊदी को परमाणु हथियार बनाने से रोकने वाले सुरक्षा नियम जोड़े ही नहीं हैं। इसके पीछे की साजिश समझिए। आमतौर पर जब अमेरिका किसी देश को परमाणु तकनीक देता है, तो उस पर सख्त पाबंदियां लगाता है। लेकिन सऊदी अरब के साथ इस डील में कई बड़ी ढील दी गई हैं। सऊदी अमेरिकी जौहरी डील के तहत सऊदी अरब अब अपनी ही जमीन पर यूरेनियम को रिफाइन कर सकेगा। अमेरिका के पुराने नियमों के मुताबिक, किसी भी देश को यूरेनियम एनरिच करने या न्यूक्लियर कचरे को रीप्रोसेस करने की इजाजत नहीं थी। अब अमेरिका ने चुपके से सऊदी वाली डील से इस शर्त को हटा दिया है। इतना ही नहीं इस समझौते के तहत यूनाइटेड नेशन्स की न्यूक्लियर एजेंसी, आईएईए को बिना बताए अचानक चेकिंग करने की इजाजत नहीं होगी। बताया गया है कि यूरेनियम एनरिचमेंट से जुड़े सभी सुरक्षा नियम केवल अमेरिका और सऊदी आपस में मिलकर तय करेंगे।
कुछ मीडिया रिपोर्ट तो ये भी कहती रही हैं कि ट्रंप ने इस शर्त पर सऊदी से लचीला न्यूक्लियर समझौता किया है कि आगे आने वाले वक्त में वो ट्रंप की मंशा के मुताबिक, इजरायल के साथ अब्राहम समझौता करे यानी इजरायल को मान्यता दे। हो सकता है भविष्य में इस समझौते का असर सऊदी-इजरायल की दोस्ती के रुप में देखने को मिलें।
जिस तरह से अमेरिका ने सऊदी के साथ न्यूक्लियर समझौता किया है, उससे अब वेस्ट एशिया में परमाणु हथियार बनाने की नई रेस शुरू हो सकती है। अगर सऊदी अरब अपनी धरती पर यूरेनियम एनरिचमेंट शुरू करता है, तो ईरान भी और तेजी से करेगा क्यों उसके पास तो पहले से ये तकनीक है। अब कई दूसरे अरब देश भी इस तरह के कदम उठा सकते हैं। वहीं दुनिया के दूसरे देश भी अब अमेरिका से बिना कड़े नियमों के परमाणु तकनीक मांग सकते हैं।

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