-सूफी खान
-अमेरिका-इजरायल को सुना डाला!
जहां एक तरफ अमेरिका ९ हजार फौजी और तीन जंगी बेड़े फिर से फारस की खाड़ी में भेजने की तैयारी कर रहा है, ईरान भी अपने हथियारों को धार दे रहा है। वेस्ट एशिया में जंग के बादल फिर मंडरा रहे हैं। इस बीच अली लारीजानी के नाम का जिक्र अचानक से तेज हुआ है। रूस के प्रेसिडेंट और ईरान के करीबी दोस्त व्लादिमीर पुतिन ने एक प्रोग्राम में कहा है कि इजरायल-अमेरिका के जरिए अली लारीजानी का कत्ल किया जाना एक बहुत बड़ी गलती थी। वो जिंदा होते तो खित्ते में हालात कुछ और होते। अली लारीजानी जो ईरान में सुप्रीम सिक्योरिटी काउंसिल के चीफ हुआ करते थे और सुप्रीम लीडर के सलाहकार थे। इजरायल ने एक खुफिया अटैक में उनका कत्ल कर दिया था। रूस ने उस समय में अली लारीजानी पर हमले को इंटरनेशनल कानूनों का उल्लंघन बताया था और इजरायल के इस कदम को मर्डर करार दिया था।
बड़ी बात ये है कि पुतिन को अचानक दिवंगत अली लारीजानी क्यों याद आए? एक्सपर्ट कहते हैं कि इसकी वजह है ट्रंप का उतावलापन और लगातार बदलते एक्शन, अगर अली लारीजानी होते तो वो अमेरिका से सही ढंग से बात कर सकते थे। ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशन में उन्हें एक सुलझे हुए और सबको साधने वाले लीडर के तौर पर जाना जाता था, इसलिए पुतिन ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से अली लारीजानी को जानते थे।
सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी के रूप में वे जंग, कूटनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों के केंद्र में थे। उनकी आवाज पूरे सिस्टम में असर रखती थी, खासकर अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के टकराव को संभालने में। २८ फरवरी को सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या के बाद, लारीजानी ने सख्त रुख अपनाया और संकेत दिया था कि ईरान लंबे संघर्ष के लिए तैयार है।
वेस्ट या मगरिब के खिलाफ अपने सख्त रुख के बावजूद, लारीजानी को ईरान के भीतर अक्सर एक व्यावहारिक नेता के रूप में देखा जाता था।
वे पश्चिमी ताकतों के साथ रिश्ते को लेकर गहरे संदेह में थे, लेकिन अहम कूटनीतिक कोशिशों में भी शामिल रहे, जिसमें चीन के साथ ईरान के दीर्घकालिक सहयोग समझौते में एक दूत के रूप में काम करना भी शामिल है। उन्हें एक लचीले व्यक्ति के तौर पर देखा जाता था, जो हर पहलू को समझने की कोशिश करता है। शायद यही वजह है कि उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में भी देखा जाता था, जिनके साथ बातचीत की जा सकती है।
लेकिन समस्या यह है कि इजरायल इनमें से किसी के साथ भी बातचीत नहीं करना चाहता था और उसने अली लारीजानी को ही खत्म कर दिया। व्लादिमीर पुतिन ने ये भी कहा कि पूरी दुनिया इस वक्त हो रही घटनाओं पर नजर बनाए हुए है और ईरानी जनता के साहस, बहादुरी और उनके जबरदस्त पलटवार से हैरान है।
