फर्जी छात्र संख्या के आधार पर भरी गईं अतिरिक्त सीटें
-डिजिटल जांच में खुली परतें
-जिम्मेदारी से भाग रही है सरकार
-छात्रों के भविष्य पर छाया अंधकार
सामना संवाददाता / मुंबई
महायुति सरकार के राज में शिक्षा व्यवस्था का जनाजा निकल चुका है। ‘स्कूल में नाम और सत्ता के दरबार में काम’ के काले खेल ने शिक्षकों को ज्ञान देने के बजाय विधायकों की ‘पीए-गीरी’ में धकेल दिया है। डिजिटल जांच में हुए सनसनीखेज खुलासे ने सरकार की पोल खोल दी है, जहां फर्जी छात्र संख्या दिखाकर कागजों पर हजारों अतिरिक्त सीटें डकारी गर्इं और सरकारी खजाने को चूना लगाया गया। जब भ्रष्टाचार की परतें खुलीं तो जवाबदेही लेने के बजाय सरकार बेशर्मी से मैदान छोड़कर भाग रही है। सत्ताधारी आकाओं और प्रशासनिक मिलीभगत ने हजारों मासूम छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया है। यह सिर्फ नीतिगत विफलता नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य के साथ किया गया सबसे बड़ा विश्वासघात है।
बता दें कि ‘महायुति’ सरकार के राज में जिस शिक्षक के हाथों में देश का भविष्य गढ़ने की जिम्मेदारी रहती है, उन्हें स्कूलों से उठाकर विधायकों की ‘जी-हुजूरी’ और ‘पीए’गीरी में झोंक दिया गया है। डिजिटल जांच ने उस ‘फर्जीवाड़े’ का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है, जिसमें केवल कागजों पर छात्र संख्या बढ़ाकर हजारों अतिरिक्त सीटें हथिया ली गर्इं। सरकारी और निजी अनुदानित स्कूलों के सभी शिक्षक व गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों की जानकारी जब शालार्थ प्रणाली से जोड़ी गई, तब यह गड़बड़ी सामने आई। हालांकि, जिम्मेदारी लेने के बजाय सरकार ‘शुतुरमुर्गी’ रुख अपनाकर जवाबदेही से भाग रही है।
मार्च महीने का रुका वेतन
शिक्षा अधिकारियों की मंजूरी के बावजूद कई कर्मचारियों की एंट्री रजिस्टर में न मिलने से गड़बड़ी उजागर हुई। इसी के चलते १७ हजार स्कूलों के करीब ३ लाख शिक्षकों के दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड कर एसआईटी जांच शुरू की गई है, जबकि मंजूर पदों से अधिक भर्तियों का भी ब्योरा मांगा गया है। अब शालार्थ प्रणाली के ऑनलाइन सत्यापन के बाद ही वेतन जारी हो रहा है।
‘पीए’ शिक्षकों की मांगी जानकारी
राज्य में कुछ विधायकों और जनप्रतिनिधियों के निजी सहायक शिक्षक हैं। उनकी नियुक्ति स्कूलों में शिक्षक के रूप में है, लेकिन वे लगातार जनप्रतिनिधियों के साथ ही कार्यरत रहते हैं। ऐसे सभी शिक्षक और गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों की जानकारी शिक्षा विभाग ने मांगी है, जो नियुक्ति स्थान के अलावा अन्य विभागों में काम कर रहे हैं।
मंजूरी से अधिक भर्ती पर कार्रवाई
माध्यमिक शिक्षा विभाग के सह संचालक डॉ. श्रीराम पानझडे के मुताबिक, भविष्य में शिक्षक भर्ती, छात्र संख्या और संच मान्यता में गड़बड़ी रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने सभी कर्मचारियों का डिजिटल डेटा तैयार किया है। अब केवल मंजूर पदों के अनुसार ही वेतन दिया जाएगा। इसके अलावा जो कर्मचारी नियुक्ति स्थान पर कार्य नहीं कर रहे, बल्कि अन्य विभागों में काम कर रहे हैं, उनके मामले में भी अलग से निर्णय लिया जाएगा।
