-टिकट का लॉलीपाप दिखाकर अंत में काटा टिकट
-अब भाजपा पर फूटा वैश्य समाज का गुस्सा
-छीतरमल गुप्ता ने बीजेपी विधायक को बताया अहंकारी
संदीप पांडेय / भायंदर
अखिल वैश्य फाउंडेशन के संस्थापक एवं वरिष्ठ समाजसेवक छीतरमल महादेव गुप्ता ने मीरा-भायंदर में वैश्य समाज के साथ हो रहे राजनीतिक अन्याय, उपेक्षा और अपमान को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने दो टूक कहा कि राजनीति में जब अहंकार और घमंड प्रवेश करता है, तब किसी भी संगठन के पतन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
गुप्ता ने कहा कि मीरा-भायंदर क्षेत्र में भाजपा विचारधारा के समर्थक मतदाताओं की संख्या अधिक होने के कारण बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता स्वयं को राजनीति का सर्वेसर्वा समझने की भूल कर बैठे हैं। इसी अहंकारी मानसिकता का परिणाम है कि वर्षों से जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं, समाजसेवकों और निष्ठावान समर्थकों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्य समाज को भाजपा से कोई बैर नहीं है, लेकिन घमंडी, धोखेबाज और जनता से कटे हुए नेताओं की राजनीति किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। पार्टी के भीतर भी भारी असंतोष व्याप्त है, जिसका परिणाम आगामी १६ जनवरी को जनता के लोकतांत्रिक निर्णय के रूप में सामने आएगा।
गुप्ता ने टिकट वितरण प्रक्रिया को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, पक्षपातपूर्ण और अपमानजनक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई योग्य उम्मीदवारों से भारी खर्च कराकर पार्टी का प्रचार कराया गया, लेकिन अंत में उन्हें बिना किसी ठोस कारण के टिकट से वंचित कर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। यह आचरण न केवल अनैतिक है, बल्कि इसके दूरगामी राजनीतिक परिणाम भी तय हैं। उन्होंने पालघर नगरपालिका चुनाव में भाजपा की हार को इसी मानसिकता का प्रत्यक्ष उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि आज मीरा-भायंदर में वैश्य समाज, हिंदी भाषी समाज और महाराष्ट्रीयन समाज में गहरा रोष है। कुछ नेताओं की कार्यशैली न जनहित में है और न ही नैतिक मूल्यों के अनुरूप। जनता सब कुछ देख रही है और समय आने पर अपने मत से उचित निर्णय देगी। वैश्य समाज के अनेक योग्य और जनाधार वाले रोहित छीतरमल महादेव गुप्ता, सुनील केशरी, संदीप अग्रवाल, सपना निरंजन मोर, डॉ. सुशील अग्रवाल और ओमप्रकाश गाड़ोदिया को दरकिनार कर दिया गया, जिससे समाज में भारी असंतोष है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका असर केवल इस मनपा चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों में भी इसके निर्णायक परिणाम देखने को मिलेंगे।
