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सरकारी जमीनों पर कब्जे का जाल…कार्रवाई सिर्फ दिखावा!

राजेश सरकार / प्रयागराज

यूपी के संगम नगरी में सरकारी जमीनें अवैध कब्जों की जद में कितनी गहराई तक फंसी हैं, इसका अंदाजा शनिवार को आयोजित थाना समाधान दिवस में सामने आई शिकायतों की बाढ़ से ही लगाया जा सकता है। एक-दो नहीं, बल्कि हर तहसील से जमीनों पर कब्जे, अतिक्रमण और विवादों की लंबी फेहरिस्त सामने आई, जिसने प्रशासनिक दावों की हकीकत उजागर कर दी। जिलाधिकारी के निर्देश पर अफसरों ने जरूर कुछ जगहों पर कार्रवाई कर कब्जे हटाने और सीमांकन कराने की कवायद की, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे पनपे कैसे? बारा, मेजा, कोरांव, हंडिया, करछना, सदर और फूलपुर-हर तहसील में चकमार्ग, तालाब, विद्यालय और सार्वजनिक जमीनों पर कब्जों की शिकायतें आम रहीं। कहीं तालाब की जमीन पर छप्पर डालकर कब्जा, तो कहीं चकमार्ग और नालियों पर अतिक्रमण। कई मामलों में निर्माण तक कर लिए गए, जबकि कुछ प्रकरण अब भी न्यायालय या कागजी प्रक्रिया में उलझे हुए हैं। प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर कुछ कब्जे हटवाने और सीमांकन कराने की बात जरूर कही, लेकिन यह कार्रवाई समस्या के मूल पर चोट करती नहीं दिखती। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकारी जमीनों पर कब्जे लगातार सामने आ रहे हैं, तो क्या निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है? और क्या यह अभियान केवल शिकायतों के निस्तारण तक सीमित रह जाएगा, या फिर कब्जा करने वालों पर ठोस और स्थायी कार्रवाई भी होगी?

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