आप लड़ो अब अंधेरों से ।
हम तो दीप जलाएंगे।।
पूरा घर रोशन कर देंगे ।
नई रोशनी लाएंगे।।
सारा कोहरा सारा कचरा।
हम तो दूर हटाएंगे।
भ्रम की सारी नगरी में हम।
उठकर आग लगाएंगे।।
सत्य पकड़कर ले आएंगे।
सबको आज बताएंगे।।
सोए हैं जो सोनेवाले।
उनको आज जगाएंगे।।
मानवता की दशा बताकर।
रोएंगे चिल्लाएंगे।।
कैसे आए यहां लुटेरे।
बातें सभी बताएंगे।।
सच्चाई का ग्राफ उठाकर ।
दुनिया को दिखलाएंगे।।
अपनी सारी हमजोली में।
अमन चैन ले आएंगे।।
हमदर्दों से हाथ मिलाकर।
मन ही मन मुस्काएंगे।।
हर नकार से आगे बढ़कर।
खुशियां यहां मनाएंगे।।
और यहीं पर आजादी का।
झंडा भी फहराएंगे।।
आप लड़ो अब अंधेरों से।
हम तो दीप जलाएंगे।।
-अन्वेषी
