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अतिक्रमण हटाने का दिया आदेश…चारकोप तालाब की दुर्दशा देख हाई कोर्ट भी हैरान

-अदालत बोली- हालात ‘चौंकाने वाले और भयावह’
-पहले तालाब बचाइए, फिर सौंदर्यीकरण कीजिए

सामना संवाददाता / मुंबई

कांदिवली-पश्चिम स्थित चारकोप के प्राकृतिक तालाब पर अतिक्रमण और कचरे का साम्राज्य देखकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने मुंबई उपनगर के जिलाधिकारी को तालाब से सभी अवैध निर्माण हटाने का निर्देश देते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति ‘चौंकाने वाली और भयावह’ है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि सौंदर्यीकरण से पहले तालाब को उसके प्राकृतिक स्वरूप में बहाल करना जरूरी है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखड की पीठ बृहन्मुंबई महानगरपालिका की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। बीएमसी ने तालाब से अतिक्रमण हटाने तथा संरक्षण और सौंदर्यीकरण का काम शुरू करने के लिए अदालत की अनुमति मांगी थी।
यह तालाब मैंग्रोव क्षेत्र के ५० मीटर के बफर जोन में आता है। बीएमसी ने अदालत को बताया कि महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण, मैंग्रोव सेल और राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण से जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं। हालांकि २०१८ के हाई कोर्ट आदेश के कारण मैंग्रोव और उसके बफर क्षेत्र में किसी गैर-वन गतिविधि से पहले अदालत की अनुमति आवश्यक है।
बीएमसी के वकील ने तालाब की मौजूदा हालत की तस्वीरें अदालत में पेश कीं। इनमें अवैध ढांचे और भारी मात्रा में जमा कचरा दिखाई दिया। नगर निकाय ने बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाने का भरोसा दिलाया है, जिससे खारे पानी का प्राकृतिक प्रवाह दोबारा तालाब तक पहुंच सकेगा। हाई कोर्ट ने अधिकारियों को अगली सुनवाई में उन्हीं कोणों से ली गई नई तस्वीरें पेश करने का आदेश दिया है, ताकि जमीन पर हुए काम की वास्तविक स्थिति जांची जा सके। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि प्राकृतिक तालाब में किसी भी प्रकार का कचरा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई ६ अगस्त को होगी।
तीन तीखे सवाल
-तालाब पर अवैध निर्माण खड़े होते रहे तो बीएमसी और जिला प्रशासन कहां थे?
-मैंग्रोव के बफर क्षेत्र में कचरा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
-क्या कोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई केवल सफाई और तस्वीरों तक सीमित रहेगी?

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