मुख्यपृष्ठस्तंभफलसफा: सफर में बीत रही है जिंदगी

फलसफा: सफर में बीत रही है जिंदगी

सना खान

मुंबई में नौकरी का मतलब सिर्फ आठ घंटे दफ्तर में बिताना नहीं है। कई लोगों के लिए दफ्तर तक पहुंचना और लौटना भी जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुका है।
हाल ही में सामने आई एक कहानी ने इस हकीकत को सामने रखा। बदलापुर में रहने वाला एक कर्मचारी गोरेगांव में काम करता है। उसके मुताबिक, रोज करीब छह घंटे आने-जाने में बीत जाते हैं। मासिक आय ३५,००० रुपए है और दफ्तर के पास घर लेना उसके लिए संभव नहीं।
सुबह ५ बजे दिन शुरू होता है। ६:३० बजे घर से निकलना, ७:१५ बजे बदलापुर से ट्रेन पकड़ना, दादर में ट्रेन बदलना, गोरेगांव पहुंचना और फिर साझा रिक्शे का इंतजार। करीब १० बजे दफ्तर पहुंचना। शाम ७ बजे निकलना और रात ११ बजे घर लौटना। यानी दिन का बड़ा हिस्सा काम और सफर में ही बीत गया। यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है। मुंबई में घर और रोजगार के बीच बढ़ती दूरी अब बड़ा सवाल है। दफ्तर के पास घर महंगा है, इसलिए लोग दूर और अपेक्षाकृत सस्ते इलाकों में रहते हैं। किराया बचता है, लेकिन उसके बदले समय और थकान बढ़ती है।
टॉमटॉम यातायात सूचकांक २०२५ के अनुसार, मुंबई में यातायात दबाव ६३.२ प्रतिशत था। सुबह व्यस्त समय में औसत गति १८.५ किलोमीटर और शाम को १६.९ किलोमीटर प्रति घंटा रही। वर्ष २०२५ में व्यस्त समय के यातायात के कारण करीब १२६ घंटे का अतिरिक्त समय खर्च हुआ। अगर कोई व्यक्ति रोज छह घंटे सफर करे और महीने में २६ दिन काम करे, तो वह महीने में करीब १५६ घंटे और साल में लगभग ७८ दिन सिर्फ सफर में बिताता है। यह समय वेतन में नहीं जुड़ता। इसकी कीमत नींद, परिवार और अपने लिए बचे समय से चुकानी पड़ती है।
यहीं सवाल सिर्फ यातायात का नहीं, घर का भी है। अगर ३५,००० रुपए कमाने वाला व्यक्ति अपने काम के पास घर नहीं ले सकता, तो सस्ता घर ही पर्याप्त समाधान नहीं है। यह भी जरूरी है कि घर और रोजगार के बीच की दूरी कम हो। मुंबई का विकास केवल सड़क, पुल और इमारतों से नहीं मापा जाना चाहिए। यह भी देखना होगा कि आम आदमी के पास जीने के लिए कितना समय बचता है। मुंबई हमेशा तेज रही है। लेकिन सवाल है कि क्या इस तेज शहर में उसके लोगों के पास जीने की रफ्तार तय करने का समय भी बचा है। आखिर हम काम जिंदगी बेहतर बनाने के लिए करते हैं। अगर जिंदगी का बड़ा हिस्सा काम तक पहुंचने में ही बीत जाए, तो जिंदगी आखिर कब शुरू होगी?

अन्य समाचार