मुख्यपृष्ठस्तंभसियासी सरगोशियां: राम मंदिर का चंदा, कोर्ट की ‘फटकार' और फांसी की...

सियासी सरगोशियां: राम मंदिर का चंदा, कोर्ट की ‘फटकार’ और फांसी की बात!

ईश्वरी राज

अरे भैया, हमारे देश में घोटालों की कोई कमी नहीं है, लेकिन जब बात भगवान के नाम पर आए चंदे की हो, तो मामला थोड़ा ज्यादा ही गरम हो जाता है! हाल ही में जब इलाहाबाद हाई कोर्ट में अयोध्या के राम मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे की कथित हेराफेरी का मामला पहुंचा, तो अदालत का पारा भी चढ़ गया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए इतनी तल्ख टिप्पणी कर दी कि सुनकर भ्रष्टाचारियों के पसीने छूट जाएं।
क्या है पूरा माजरा?
बात कुछ यूं है कि राम मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा और जेब दोनों खाली करके दान दिया था। अब आरोप यह लगा कि कुछ ‘चतुर’ लोगों ने इस पवित्र चंदे में भी अपना हाथ साफ करने की कोशिश की या वित्तीय गड़बड़ियां कीं। जब यह याचिका हाई कोर्ट के सामने आई, तो जज साहब का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
कोर्ट का ‘हाई-वोल्टेज’ डायलॉग!
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने बेहद कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने मौज-मस्ती के मूड में नहीं, बल्कि बेहद सख्त लहजे में कहा कि ‘पवित्र धार्मिक कार्यों और राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र के नाम पर मिलने वाले चंदे में भ्रष्टाचार करने वालों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।’ अदालत ने यहां तक टिप्पणी कर दी कि ‘देश में भ्रष्टाचार पैâलाने वालों और धर्म के नाम पर ठगी करने वालों को तो फांसी की सजा दे देनी चाहिए!’ अब जज साहब का यह बयान कोई औपचारिक कानून तो नहीं बन गया, लेकिन संदेश बिल्कुल शीशे की तरह साफ है। भगवान के घर में देर हो सकती है, पर जब कानून का डंडा चलता है तो फिर कोई बचाव का रास्ता नहीं बचता।
जनता का रिएक्शन
लोग अब चटकारे लेकर कह रहे हैं कि भाई, कम से कम भगवान के चंदे को तो छोड़ देते! अब देखना यह होगा कि कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद जांच एजेंसियां कितनी तेजी से हरकत में आती हैं और ‘चंदा चोरों’ पर क्या कार्रवाई होती है।

अन्य समाचार