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सिनेमा के “हीमैन” को रास नहीं आई राजनीति

हिमांशु राज

हिंदी सिनेमा के जमीनी बादशाह धर्मेंद्र ने अपने करियर में जितनी ऊंचाइयां फिल्मों के पर्दे पर देखीं, उतनी सहजता राजनीति में नहीं पा सके। स्क्रीन पर जनता के दिल पर राज करने वाले इस अभिनेता ने राजनीतिक गलियारों में कदम तो रखा, मगर उनका मन वहां कभी नहीं ठहरा।राजस्थान के बीकानेर से सांसद बनने के बाद धर्मेंद्र अचानक देश की संसद में एक नए किरदार के रूप में दिखाई दिए। पर शासन और नीति की दुनिया उनके स्वभाव से मेल नहीं खा पाई। स्टेज पर दमदार डायलॉग बोलने वाला सितारा संसद की औपचारिक चर्चाओं और राजनीतिक साज़िशों में घुल नहीं पाया। उनके साथियों ने अक्सर महसूस किया कि धर्मेंद्र की रुचि उस चमकदार संसार में ही है, जहां अभिनय और भावनाएं राजनीति से ताकतवर होती हैं।लोगों से जुड़ने की उनकी शैली बचपन जैसी सच्चाई लिए रहती थी। वे राजनीति की गणनात्मक भाषा में सहज नहीं हो पाते थे। जब दूसरे नेता रणनीति बनाते, धर्मेंद्र लोगों से हंसी-मजाक और अपनत्व से बातें करते। शायद यही कारण था कि सांसद बनने के बावजूद उन्होंने कभी उस दबाव या गंभीरता को अपने ऊपर नहीं हावी होने दिया जो एक राजनेता के लिए जरूरी मानी जाती है। बीकानेर की जनता से किया गया उनका वादा यह था कि वे क्षेत्र को नई पहचान दिलाएंगे, लेकिन धीरे-धीरे सरकारी व्यवस्था की जटिलताओं ने उनके जोश को ठंडा कर दिया। उन्हें एहसास हुआ कि फिल्म की पटकथा की तरह राजनीति में चीजें आसानी से नहीं बदलतीं। इस एहसास ने उन्हें सिनेमा की ओर लौटने पर मजबूर किया, जहां वे अपने किरदारों और दर्शकों के बीच फिर वही पुराना प्यार महसूस कर सकते थे। 2009 के बाद धर्मेंद्र ने फिर कभी चुनावी चकाचौंध की तरफ कदम नहीं बढ़ाया। उन्होंने खुद को अपने परिवार, फिल्मों और पुराने साथियों तक सीमित कर लिया। दिलचस्प है कि जबकि उनकी पत्नी हेमामालिनी और बेटा सनी देओल आज भी राजनीति की राह पर सक्रिय हैं, धर्मेंद्र का झुकाव हमेशा कला के संसार में ही रहा। उनके लिए असली मंच वही था, जहां कैमरे की रोशनी होती है और दर्शकों का स्नेह तालियों में गूंजता है। लगभग साठ साल के करियर में धर्मेंद्र ने सैकड़ों फिल्मों से दर्शकों को भावनाओं का रंग दिया। अब उनकी उम्र के इस पड़ाव पर भी लोग उन्हें एक अभिनेता के रूप में ही याद करते हैं, न कि एक राजनेता के रूप में। राजनीति की दुनिया उन्हें रास न आई, लेकिन कलाकार धर्मेंद्र आज भी जनता के दिलों के प्रतिनिधि बने हुए हैं।

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