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फिल्म ‘प्रेम कीटाणु’ समीक्षा…वीर पहाड़िया और आफिया सैयद की केमिस्ट्री ने जीता दिल

-असरदार यूथफुल ड्रामा

सामना संवाददाता / मुंबई
फिल्म ‘प्रेम कीटाणु’ एक युवाओं पर आधारित हल्की-फुल्की रोमांटिक ड्रामा है, जो दोस्ती, पहले प्यार और युवावस्था के भावनात्मक उतार-चढ़ाव को दर्शाती है। इस फिल्म में वीर पहाड़िया और आफिया सैयद मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि अपारशक्ति खुराना भी एक महत्वपूर्ण किरदार में नजर आते हैं। फिल्म का निर्देशन अपूर्व सिंह कार्की ने किया है और इसके निर्माता दिनेश विजान एवं जियो स्टूडियोज हैं। ‘दोपहर का सामना’ इस फिल्म को ४ सितारे देती है। फिल्म की कहानी और अन्य पहलुओं के बारे में विस्तार से जानने के लिए समीक्षा को आगे पढ़ें।
फिल्म की कहानी विशाल (वीर पहाड़िया) और सुहानी (आफिया सैयद) के इर्द-गिर्द घूमती है। बनारस इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में पढ़ाई के पहले ही दिन दोनों के बीच तीखी बहस हो जाती है और वे एक-दूसरे को कॉलेज के चार सालों तक सिंगल रहने की चुनौती दे बैठते हैं। वक्त के साथ सुहानी का दाखिला दिल्ली के एक प्रतिष्ठित संस्थान में हो जाता है, जबकि विशाल अपनी पढ़ाई में संघर्ष करता रहता है। सालों बाद जब दोनों दिल्ली में दोबारा मिलते हैं, तो विशाल अमेरिका में उच्च शिक्षा के लिए धन जुटाने की कोशिश कर रहा होता है। दोनों का रिश्ता फिर से गहराने लगता है, लेकिन सुहानी के बॉस रंजीत (अपारशक्ति खुराना), जो सुहानी को पसंद करता है, के कारण उनके रिश्तों में नई उलझनें और गलतफहमियां पैदा होने लगती हैं।

फिल्म का पहला हाफ कॉलेज के माहौल, मस्ती और दोस्तों के बीच की चुटीली बातचीत से भरा हुआ है, जो दर्शकों को आसानी से अपने से जोड़ लेता है। हास्य और संवाद काफी स्वाभाविक लगते हैं। फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, यह मस्ती से हटकर भावनात्मक संघर्ष और दिल टूटने के अहसास की ओर मुड़ती है, जिससे कहानी में गहराई आती है। इसके गाने जैसे ‘कहो तो’, ‘तू मेरा रइयो’ और ‘इश्क का गुलाम’ कहानी के रोमांटिक मूड को और मजबूत बनाते हैं।
अभिनय की बात करें तो वीर पहाड़िया ने अपनी ऊर्जा और सहज उपस्थिति से विशाल के किरदार को अच्छे से निभाया है। आफिया सैयद ने सुहानी के रूप में बेहतरीन काम किया है और दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री काफी प्रभावी लगती है। अपारशक्ति खुराना ने अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से एक बार फिर प्रभावित किया है। निर्देशक अपूर्व सिंह कार्की ने युवा दर्शकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुति को रंगीन, मनोरंजक और भावनात्मक बनाए रखा है। कुल मिलाकर, ‘प्रेम कीटाणु’ एक मनोरंजक और हल्की-फुल्की फिल्म है जो चेहरे पर मुस्कान छोड़ जाती है।

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