-राहुल गांधी ने इनकी दुकान पर जाकर सिले थे जूते…दी थी अत्याधुनिक सिलाई मशीन
विक्रम सिंह / सुल्तानपुर
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाक़ात के बाद मीडिया की सुर्खियों में आए सुल्तानपुर के रामचेत मोची नहीं रहे। कैंसर से लड़ते-लड़ते वे आखिरकार ज़िंदगी की जंग हार गए। वे मूलतः यूपी के सुल्तानपुर जिले के कूरेभार थानान्तर्गत ढेसरुआ गांव के निवासी थे। लंबे समय से वे कैंसर और टीबी से जूझ रहे थे। बीते वर्ष एक अदालती मामले में सुल्तानपुर पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी लौटते समय अचानक रामचेत की गुमटी पर रुके थे। उन्होने रामचेत की खराब आर्थिक स्थिति देख मदद का आश्वासन दिया था। इसके बाद उन्हें जूते-चप्पल सिलाई की अत्याधुनिक मशीन और कच्चा माल उपलब्ध कराकर उनके व्यवसाय को नई राह देने की कोशिश की थी।मदद मिलने के बाद रामचेत का काम कुछ ही समय में पटरी पर लौटने लगा था,लेकिन तभी किस्मत ने दगा दे दिया। उन्हें कैंसर और टीबी ने चपेट में ले लिया। हालत बिगड़ने पर राहुल गांधी की पहल पर उनका इलाज प्रयागराज में कराया जा रहा था।राहुल गांधी की कोशिशों के बावजूद रामचेत की ज़िंदगी नहीं बच सकी और आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से ढेसरुआ गांव सहित आसपास क्षेत्र में शोक की लहर है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।गांव के लोगों ने बताया कि रामचेत मेहनती और स्वाभिमानी इंसान थे,जिन्होंने गरीबी में भी हार नहीं मानी थी। राहुल ने मोची के शोकसंतप्त बेटे से फोन पर बात की। उन्हें हरसंभव सहायता करने का आश्वासन दिया है। उधर स्थानीय कांग्रेसियों ने जिलाध्यक्ष अभिषेक सिंह राणा के साथ दिवंगत मोची के अंतिम संस्कार में पहुंचकर उन्हें भावभीनी अंतिम विदाई दी।
