मुख्यपृष्ठस्तंभरौबीलो राजस्थान : साहित्यिक मार्केट रै शेयरां में उतार-चढ़ाव

रौबीलो राजस्थान : साहित्यिक मार्केट रै शेयरां में उतार-चढ़ाव

बुलाकी शर्मा, राजस्थान

‘नमस्कार भाईजी। अदीतवार नैं म्हारै नूंवै कविता संग्रै रो लोकार्पण तैवड़ीज्यो है। आपनैं अध्यक्ष रूप पधार’र मंच री सोभा बधावणी है।’
अध्यक्ष बणन रो नूंतो म्हारै में ऊर्जा रो संचार कर दियो। टांगड़ी रै प्लास्टर चढ़्योड़ो हुवतै थकां ई ना कोनी करीज्यो।
फोन माथै मिठास सूं पड़ूत्तर दियो, ‘नूंवै कविता संग्रै रै छपण री अणथाग बधायां कविराज धाकड़ जी। आपरै कविता संग्रै रै लोकार्पण समारोह में सहभागी बणनो म्हारो सौभाग हुवैला। पण…’
‘पण कांई भाईजी,’ बे बिचाळै ई बोल्या, ‘पैला सूं कठैई बुक हो क्या अदीतवार नैं।’
‘ना ना धाकड़ जी,’ म्हैं फुरती सूं जवाब दियो,’ किणनैं ई हंकारो भरियोड़ो हुवतो तो बीं नैं मना कर’र आपरै आवतो। आपांरा साहित्यिक संबंध बरसां सूं है।’ ‘फेर पण वण कांयरो,’ धाकड़ जी रै सुर में नाराजगी साफ झळक रैई ही। ‘म्हारै टांग रै पक्को पाटो बंधियोड़ो है, जे आवण-जावण सारू गाडी रो सांझ बैठाय देवो तो…’
‘आंधो नूंतो दो जिमावो… इसा डोफा आपां कोनी बुलाकी भाईजी,’ धाकड़ जी बिचाळै ई खळकाई, ‘सीनियर्रिटी रो मुलायजो राखतां थांनैं वैâयो हो। बियां अध्यक्ष बणन सारू मूंडा धोयोड़ा घणाई त्यार है। मंच री सौभा बणन सारू कैई तो ल्याई खरचो-पाणी करण नैं त्यार रैवै।’
धाकड़ जी फोन काट दियो अर पछै म्हारी आ ‘ठकराई’ साहित्य समाज में इत्ती वायरल हुयगी वैâ म्हनैं भाईड़ा साहित्यिक कार्यक्रमां री सूचना देंवणी ई बंद कर दीवी, तबीयत रो पूछण री तो खैर किणनैं फुरसत मिलै।
कवि धाकड़ जी रै ओळावै म्हारी घायल टांग री घटना नैं गोळ कर’र आ बात वायरल करीजी वैâ बो खुद नै सुपर-डुपर लेखक मानै अर ‘ठकराई’ सूं कैवै वैâ प्रोग्राम में बुलावणो है तो गाडी भेजो। उमर देख’र मान करां, लिखै क्या है, आपां सगळा जाणां!
ट्रम्प रा स्टेटमेंट दुनिया रै शेयर मार्वेâट में तुरता-फुरत तेजी-मंदी लावै बियां ई म्हारै स्हैर रै साहित्यिक मार्वेâट में म्हारा शेयर इसा ऊंधै मूंडै पड़िया है वैâ पाछा उठणा मुस्कल लाग रैया है अर जिकां रा कोई भाव ई नीं निकळता, साहित्यिक मंच माथै बैठण रो मौको नीं मिलतो, उछळ’र बे तेजी रो मजो लेय रैया है।
साहित्य री दुनिया मार्वेâट ई है। खुद रो नांव जमावण अर दूजै रो नांव बदनांव करण सारू कूड़ी बातां वायरल करीजै। लिखै किसोक हो, बीं सूं बेसी उठा-पटक रा टोटका जाणना जरूरी है‌‌। देखो, म्हारा साहित्यिक शेयर अबै कद तांई चांवैâसर आवैला।

अन्य समाचार