सामना संवाददाता / नई दिल्ली
दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार बम धमाके की जांच में बड़ा पर्दाफाश हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में अब पता चला है कि लाल किले के पास हुआ धमाका आधे तैयार आईईडी टाइमर मैकेनिज्म डिवाइस के जरिए किया गया था। इस विस्फोटक को तैयार करने के लिए एसीटोन यानी नेल पॉलिश रिमूवर और पिसी हुई चीनी जैसी आम चीजों का इस्तेमाल किया गया था। जांच के दौरान बरामद विस्फोटक की जांच करने के बाद तय हो गया है कि फरीदाबाद में मिले बम और लाल किला ब्लास्ट में इस्तेमाल बम एक जैसे थे और इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि डॉक्टर उमर मोहम्मद था, जिसकी मौत हो चुकी है।
इस बम धमाके की जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि यह आतंकी मॉड्यूल अपने बीच बातचीत के लिए चीनी भाषा का इस्तेमाल करता था। गिरफ्तार आतंकियों के कबूलनामे के मुताबिक, उमर ने सिर्फ छह महीने में चाइनीज भाषा सीख ली थी और उसने एक गुप्त ग्रुप बनाया था जिसमें बातचीत और ग्रुप का नाम दोनों चीनी भाषा में थे। इस ग्रुप का एडमिन खुद उमर था और मॉड्यूल के बाकी सदस्य भी उसी भाषा में उससे बातचीत करते थे। डॉक्टर उमर खुद को ‘अमीर’ यानी शासक, सेनापति या राजकुमार कहता था। उसे नौ से ज्यादा भाषाएं आती थीं, जिनमें हिंदी, उर्दू, अंग्रेजीr, पर्सियन, अरबी, चाइनीज और प्रâेंच शामिल हैं। गिरफ्तार आतंकी मुज्जमिल के मुताबिक, उमर बेहद तेज दिमाग वाला इंसान था और चाहता तो न्यूक्लियर साइंटिस्ट बन सकता था, लेकिन उसकी सोच कट्टरपंथी हो चुकी थी।
बम बनाने के सामान से भरा रहता था सूटकेस
पुलिस जांच के मुताबिक, जुलाई २०२३ की नूंह हिंसा और नासिर-जुनैद भिवानी हत्याकांड की घटनाओं ने उमर को और उकसाया, जिसके बाद उसने एक बड़े हमले की योजना बनानी शुरू की। पूछताछ में यह भी सामने आया कि २०२२ में श्रीनगर में उमर, मुज्जमिल, डॉक्टर अदील, डॉक्टर शाहीन और मुफ्ती इरफान पहली बार मिले और वहीं से इस आतंकी मॉड्यूल की शुरुआत हुई।
