जय
बॉलीवुड में जहां चमक-दमक और शोहरत का संसार है, वहीं कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जो विनम्रता और संस्कार के प्रतीक बन जाते हैं। धर्मेंद्र जी और उनका परिवार सनी देओल, बॉबी देओल इसी विरासत के प्रतिनिधि हैं। बात उन दिनों की है, जब फिल्म ‘यमला पगला दीवाना’ की शूटिंग फिल्म सिटी में चल रही थी। उस समय भोजपुरी सिनेमा के आज के पावर स्टार पवन सिंह अपने संघर्ष के शुरुआती दौर में थे और अक्सर भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता पवन सिंह और जय सिंह हमेशा साथ रहते थे।
उसी दौरान पवन सिंह ने धरमजी से मिलने की इच्छा जताई कि उन्हें धरम जी से मिलना है।
उनकी यह भावना जय सिंह ने वहां मौजूद धरम जी के परिवार के करीबी अभिनेता गुरुबक्श जी को बताई और उन्होंने यह संदेश धरम जी तक पहुंचा दिया और धरम जी से मिलवाया, जब मैंने धरम जी से कहा कि आपके और भैया (सन्नी देओल) के साथ फोटो खिंचानी है तब धरम जी ने हां-हां क्यों नहीं भैया के साथ भी खिंचा लो और फिर जो हुआ, उसने सबका दिल जीत लिया।
धरम जी ने न केवल पवन सिंह और जय सिंह से मिलकर मुलाकात की, बल्कि अपने दोनों बेटों सनी और बॉबी देओल को बुलाकर वैनिटी के बाहर उनके साथ एक यादगार तस्वीर भी खिंचवाई।
वह क्षण केवल एक मुलाकात नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी इंसानियत और नम्रता सबसे ऊंचे आदर्श हैं।
धरम जी का यह व्यवहार उस सोच की पहचान है, जिसने हिंदी सिनेमा को ‘परिवार’ और ‘संस्कार’ की परंपरा दी। आज धरम जी हमारे बीच नहीं, लेकिन वे हमेशा हमारे दिलों में हमारी यादों में रहेंगे। उनका परिवार यूं ही भारतीय सिनेमा की मर्यादा और मानवता की मिसाल बना रहे।
