शैलेंद्र श्रीवास्तव
बॉलीवुड के ‘ही मैन’ और लोकप्रिय अभिनेता धर्मेंद्र ने सोमवार को इस दुनिया को सदा के लिए अलविदा कह दिया और अपने पीछे स्मृतियों की कई कथाएं छोड़ गए। धरमजी यानी धर्मेंद्र के स्वभाव को कुछ लोग गरम भी बताते हैं, लेकिन हकीकत में उनका स्वभाव बहुत ही नरम था। वे लोगों के लिए मददगार थे। बहुत ही मिलनसार थे और बड़े ही सहज स्वभाव के धनी थे। कुछ फिल्मों की शूटिंग के दौरान उन्हें मैं देख चुका था। लेकिन मुझे भी उनसे रू-बरू होने और बातचीत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बात तब की है जब हेमा मालिनी जयपुर में सड़क दुर्घटना में घायल हो गईं थीं। उनके चेहरे पर चोट लग गई थी। उन्हें फौरन मुंबई लाया गया। उनकी तबीयत पूछने के लिए भीड़ न हो जाए इसलिए उनसे मिलने घर न आने का उन्होंने सभी से अनुरोध किया था। उसी दौरान देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज की मुंबई में भागवत कथा होनी थी, जिसमें हेमा मालिनी की सहभागिता होनी थी। देवकीनंदन ठाकुरजी मूलत: मथुरा-वृंदावन से हैं और मथुरा हेमाजी का निर्वाचन क्षेत्र है। इसलिए उनका आपस में अच्छा परिचय है और एक-दूसरे के यहां आना-जाना भी रहा है। देवकीनंदन ठाकुर महाराज के प्रतिनिधि के रूप में हम लोगों को हेमा मालिनी से मिलने की विशेष अनुमति मिली थी। निर्देशानुसार हम उनके जुहू स्थित बंगले पर सुबह-सुबह ही पहुंच गए। उसी वक्त धर्मेंद्र भी अपने फार्म हाउस से सीधे वहीं पहुंच गए। वे जीप से बाहर निकले तो हमने देखा कि उनकी आसमानी कमीज पर मिट्टी के कुछ दाग थे। खेतों की मिट्टी उनकी पैंट में भी लगी हुई थी। जूते भी कीचड़ में सने हुए थे। उनको देखकर कोई भी समझ सकता था कि वे अपने खेतों में कुछ काम करके या मुआयना करके लौटे हैं। हमने उनका अभिवादन किया। वे बड़ी सादगी से हमसे मिले और हेमाजी की तबीयत पर चिंता जताते हुए ऊपरी मंजिल पर हेमाजी के कमरे की ओर चले गए। हेमाजी के चचेरे भाई से हमें उनकी तबीयत के बारे में काफी जानकारी मिली। कुछ देर में धर्मेंद्रजी नीचे लौटे और उन्होंने हम सबके साथ हेमाजी की तबीयत की जानकारी साझा की। धर्मेंद्रजी हम लोगों से सीधे रू-बरू हुए और उन्होंने दुखी मन से कहा कि ‘शी इज नॉट वेल, प्रे द गॉड टू रिकवर हर।’ उसके बाद उन्होंने भागवत कथा की पूरी जानकारी लेकर हमारी सराहना की। उन्होंने अफसोस जताया कि इतने अच्छे आयोजन में हेमाजी उपस्थित नहीं हो पाएंगी। धर्मेंद्रजी ने आयोजन के लिए हमें शुभकामनाएं दीं और कहा कि उनका आना भी संभव नहीं हो पाएगा, लेकिन उन्होंने कहा कि उनकी और हेमाजी की सद्भावना और समर्थन आयोजन के साथ है। धर्मेंद्रजी ने हम सबको बुलाकर अपने साथ तस्वीरें खिंचवाईं और जीप में बैठने से पहले हम सबको कहा कि ‘गॉड ब्लेस यू, ईश्वर कार्यक्रम को सफल बनाए।’ उनकी शुभकामनाएं पाकर हम उन्हें जीप तक छोड़ने पहुंचे तो उन्होंने फिर कहा ‘थैंक यू वेरी मच, गॉड ब्लेस यू ऑल।’ उन्होंने अपने जूते वहीं जीप में रखवाए और नंगे पैर ही सीट पर बैठ गए। हम लोगों को टाटा करके वे रवाना हो गए। उनकी यह विनम्रता, आत्मीयता और मिलनसार स्वभाव देखकर कहीं से भी नहीं लगा कि वे कोई सुपरस्टार हैं या बॉलीवुड के ‘ही मैन’ हैं। उन्होंने बड़े ही प्यार से हम सबसे बातें कीं। हमें संकोच हो रहा था यह भांपकर उन्होंने खुद ही आगे बढ़ कर हम सबसे हाथ मिलाया। हमें गले लगाया। उनकी इस सरलता ने हमारे मन में उनका सम्मान बहुत ऊंचा कर दिया। उनके बीमार होने की खबरों से हम द्रवित होते रहे। सोमवार को उनके अलविदा होने पर मन बहुत आहत है। ऐसी शख्सियत बहुत कम होती है। दिल के भीतर दया, करुणा, परोपकार का भाव सबमें कहां होता है। उनके अंदर ‘ईगो’ बिल्कुल नहीं था। वे सहजता और सरलता से सभी से मिलते थे। धर्मेंद्र इसीलिए महान थे और अविस्मरणीय स्मृतियों में रहेंगे। वे सदियों तक महान बने रहेंगे।
