रामदिनेश यादव / मुंबई
राज्य के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके पुराने साथी मंत्री गणेश नाईक के बीच लड़ाई अब खुलकर सामने आने लगी है। ठाणे जिले में वर्चस्व के लिए दोनों आमने-सामने आ गए हैं। एक तरफ जहां शिंदे गणेश नाईक को दबाने के लिए उनके क्षेत्र के मामलों में विशेष रुचि लेकर कार्रवाई का निर्देश दे रहे हैं वहीं गणेश नाईक भी खुलकर एकनाथ शिंदे को भ्रष्टाचारी बताने लगे हैं। शिंदे के गढ़ में बैठकर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कुछ मंत्री और यहां के कुछ बड़े नेताओं के हाथ भ्रष्टाचार में सने हुए हैं। ऐसे आरोप लगाते हुए वनमंत्री गणेश नाईक ने कहा कि ऐसे नकली और भ्रष्ट लोगों के बुर्वेâ जरूर फड़ेंगे।
नाईक ने कहा कि खासकर ठाणे के काले व दागी मंत्रियों पर कार्रवाई जरूरी है। उनका इशारा एकनाथ शिंदे और प्रताप सरनाईक की ओर था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सरकार में सभी मंत्री ठीक नहीं हैंै। यहां सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। उनका बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार में सब कुछ ठीक होने की बात कही जा रही है, तब मंत्री गणेश नाईक ने सरकार को ही वास्तविक स्थिति से अवगत कराया है। विक्रमगड में जिले की जनसभा की शुरुआत के अवसर पर नागरिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह हमला बोला। इस मौके पर विधायक हरिश्चंद्र भोले, विधायक राजेंद्र गावित और जिले के प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को पूर्वाग्रह रखकर बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। मंत्री अथवा जनप्रतिनिधि की ओर से अगर कोई अवैध काम की सिफारिश आती है तो उस पर कागजी टिप्पणी करके फाइल को पुनर्विचार के लिए निचले स्तर पर भेजा जाना चाहिए।
गणेश नाईक ने यह भी कहा कि कुछ पत्रकार, सूचना अधिकार कार्यकर्ता और समाजसेवा का मुखौटा पहनकर ब्लैकमेलिंग करने वाले लोग सक्रिय हैं। ऐसे लोगों पर भी कार्रवाई करना जरूरी है, ताकि जनता के हित में कामकाज हो सके। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उन्हें कुर्सी, सत्ता, पैसा या पॉवर का कोई मोह नहीं है और वे केवल ठाणे जिले के विकास के लिए कटिबद्ध हैं।
