मुख्यपृष्ठनए समाचारदेश की तटीय ढाल हुई और मजबूत ... स्वदेशी ‘साइलेंट हंटर’ से...

देश की तटीय ढाल हुई और मजबूत … स्वदेशी ‘साइलेंट हंटर’ से बढ़ी पनडुब्बी रोधी मारक क्षमता! …आईएनएस माहे हिंदुस्थानी नौसेना में शामिल

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
हिंदुस्थानी नौसेना ने कल अपनी तटीय युद्ध क्षमता को नया आयाम देते हुए पूरी तरह स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धपोत आईएनएस माहे को बेड़े में शामिल कर लिया। आत्मनिर्भर भारत की भावना से निर्मित यह पहला माहे-श्रेणी का एएसडब्ल्यू-सीडब्ल्यूसी युद्धपोत है, जिसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने ८० फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री से तैयार किया है। इसे नौसेना अधिकारी तेज और फुर्तील्ाा स्वदेशी साइलेंट हंटर बता रहे हैं। इससे नौसेना की पनडुब्बी रोधी मारक क्षमता में इजाफा हुआ है।
मुंबई स्थित नौसेना डॉकयार्ड में आयोजित भव्य समारोह में इस उन्नत युद्धपोत को पश्चिमी नौसेना कमान ने नौसेना को सुपुर्द किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने की, जबकि मेजबानी वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने की। इस कार्यक्रम में बताया गया कि लगभग ७८ मीटर लंबा और १,१०० टन वजनी यह छोटा, लेकिन घातक युद्धपोत डीजल इंजन और वाटर-जेट प्रणोदन से लैस है, जो इसे उथले समुद्री क्षेत्रों में तेज, फुर्तीला और बेहद शांत बनाता है। २५ नॉट की अधिकतम गति और १,८०० नॉटिकल मील की रेंज के साथ माहे तटीय सुरक्षा, निगरानी और पनडुब्बी खोज अभियानों में अहम भूमिका निभाएगा।
दो उन्नत सोनार प्रणालियां
डीआरडीओ का अभय हल माउंटेड सोनार और लो प्रâीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार स्थापित हैं, जो इसे चौबीसों घंटे पानी के भीतर लक्ष्य पहचानने में सक्षम बनाती हैं। युद्ध क्षमता के मामले में भी माहे बेहद सक्षम है। १२ बैरल एंटी सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, छह लाइटवेट टारपीडो, ३० मिमी नौसेना तोप और माइन लेइंग सिस्टम इसे किसी भी पनडुब्बी खतरे का सटीक और तेज जवाब देने में सक्षम बनाते हैं।

रखेगी सटीक नजर
आईएनएस माहे का शिखर पर अंकित उरुमी कलारीपयट्टू की लचीली तलवार, उसकी चपलता, सटीकता और घातक क्षमता का प्रतीक है। माहे के शामिल होने से देश की तटीय सुरक्षा परत और मजबूत हुई है। यह युद्धपोत समुद्री मार्गों की निगरानी, संदिग्ध पनडुब्बी गतिविधियों पर नजर रखने और पश्चिमी तट की रक्षा में एक निर्णायक भूमिका निभाने जा रहा है।

अन्य समाचार