-किसानों के हाथ खाली, शासनादेश गायब
-दो हेक्टेयर की सीमा में दोबारा पंचनामे; `७३४ करोड़ की सहायता पर संकट
सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र में सूखे और बारिश की लंबी खामोशी से खरीफ की फसल गंवाने वाले किसानों को राहत देने के नाम पर घोषणाएं तो खूब हुर्इं, लेकिन आर्थिक मदद अब तक खातों तक नहीं पहुंची। दिवाली से पहले किसानों को ५,००० रुपए की अग्रिम सहायता देने का एलान किया गया, लेकिन अब तक इसके लिए शासनादेश जारी नहीं होने से किसानों के हाथ खाली हैं। दूसरी ओर, नुकसान का आकलन करने के लिए पहले तैयार किए गए संयुक्त पंचनामों को दरकिनार कर अब दो हेक्टेयर की सीमा में दोबारा रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या फडणवीस सरकार की ५,००० रुपए की घोषणा किसानों के लिए सिर्फ लॉलीपॉप बनकर रह गई है?
बता दें कि सूखे की मार झेल रहे किसानों को दिवाली से पहले ५,००० रुपए की अग्रिम सहायता देने की घोषणा की गई थी। त्योहार नजदीक आने के साथ किसानों को उम्मीद थी कि यह राशि उनके बैंक खातों में जमा हो जाएगी। लेकिन आवश्यक शासनादेश जारी नहीं होने के कारण सहायता वितरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। दिवाली की तैयारियों के बीच आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों के सामने अब खर्चों का दबाव है। ऐसे में सवाल है कि जब सरकार ने सहायता देने का एलान कर दिया था, तो उसे लागू करने के लिए जरूरी आदेश अब तक क्यों जारी नहीं हुआ? घोषणा करने में देरी नहीं, लेकिन किसानों को पैसा देने की बारी आई तो प्रशासनिक प्रक्रिया क्यों अटक गई?
दो हेक्टेयर की सीमा, सहायता राशि घटने का खतरा!
अब सरकार ने दो हेक्टेयर की सीमा के भीतर संशोधित पंचनामा रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इससे सहायता के लिए पात्र नुकसानग्रस्त क्षेत्र में कमी आने की आशंका जताई जा रही है। सवाल यह है कि जब प्रशासन पहले ही संयुक्त पंचनामे करके नुकसान का विस्तृत आकलन कर चुका था, तो अब दोबारा रिपोर्ट तैयार करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या इस प्रक्रिया से किसानों को राहत देने में और देरी होगी?
