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आज तय होगा निकाय चुनावों का भविष्य! …सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण सीमा पर निर्णायक सुनवाई

कोर्ट की भूमिका पर पूरे महाराष्ट्र की नजर
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
महाराष्ट्र में स्थानीय निकायों के चुनावों का भविष्य आज सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किया जाएगा। ४४ नगरपालिकाएं, ११ नगर पंचायतें, २० जिला परिषदें, नागपुर और चंद्रपुर मनपाओं में होनेवाले चुनाव की आरक्षण सीमा ५० प्रतिशत पार कर गई है। इस वजह से ये चुनाव कोर्ट की चपेट में आ गए हैं। आरक्षण की सीमा का भान नहीं रखने पर चुनाव रोकने का संकेत कोर्ट ने दिया है। इस कारण इन चुनावों के टलने के संकेत हैं। ऐसे में आज सुप्रीम कोर्ट में होनेवाली सुनवाई पर संपूर्ण महाराष्ट्र का ध्यान केंद्रित है।
स्थानीय निकायों के चुनावों में ओबीसी वर्ग को २७ प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया। इस कारण अनेक जिला परिषदों और नगर पालिकाओं के चुनावों में कुल आरक्षण ५० प्रतिशत की सीमा पार कर गया है। यह सर्वोच्च न्यायालय के २०२१ के आदेश का सीधा उल्लंघन है। इस ओर ध्यान खींचते हुए विकास गवली ने अवमान याचिका दायर की है। इस पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार को फटकार लगाई थी।
निर्वाचन आयोग की बढ़ी मुश्किलें
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, चुनावों की प्रक्रिया ३१ जनवरी २०२६ तक पूरी करने के आदेश हैं। हालांकि, निकाय चुनावों में आरक्षण घोषित करते हुए उसकी सीमा को लांघकर सीधे तौर पर उल्लंघन किया है। इस वजह से चुनाव प्रक्रिया पर तलवार लटकने लगी है।

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