मुख्यपृष्ठस्तंभईरान युद्ध ने खाली किया यूरोप का ‘कवच’

ईरान युद्ध ने खाली किया यूरोप का ‘कवच’

 -पैट्रियट मिसाइलों का भंडार ‘बेहद गंभीर’ स्तर पर; रूस ने बैलिस्टिक हमला किया तो नाटो कितना तैयार?

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध ने अमेरिका के कुल पैट्रियट इंटरसेप्टर भंडार का करीब ६५ प्रतिशत इस्तेमाल कर लिया है। उधर यूक्रेन को भी रूसी हमलों से बचने के लिए लगातार पैट्रियट चाहिए। जुलाई में रूसी हमलों की तीव्रता इतनी बढ़ी कि यूक्रेन के कुछ पैट्रियट लांचर इंटरसेप्टर के अभाव में लगभग खाली रह गए।
ईरान के साथ छह महीने से चल रहे युद्ध ने अमेरिका के सामने एक ऐसा सैन्य संकट खड़ा कर दिया है, जिसका असर अब मध्य-पूर्व से हजारों किलोमीटर दूर यूरोप की सुरक्षा पर दिखाई देने लगा है। अमेरिकी और नाटो अधिकारियों के मुताबिक यूरोप में मौजूद पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर का भंडार ‘बियॉन्ड क्रिटिकल’ यानी बेहद गंभीर स्तर तक गिर चुका है। सबसे बड़ी वजह ईरान युद्ध में इन मिसाइलों की भारी खपत और यूरोप से मध्य पूर्व की ओर किए गए ट्रांसफर बताए जा रहे हैं।
यानी अमेरिका ने तेहरान की मिसाइलों से अपने मध्य-पूर्वी ठिकानों और सहयोगियों को बचाने के लिए यूरोप की ढाल पतली कर दी है। पैट्रियट का पीएसी-३ इंटरसेप्टर तेज रफ्तार बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में नष्ट करने वाले पश्चिम के सबसे महत्वपूर्ण हथियारों में है। यही कारण है कि इसकी कमी सिर्फ गोला-बारूद की समस्या नहीं, बल्कि पूरे नाटो के एयर डिफेंस में पैदा हुआ रणनीतिक छेद है।
यही स्थिति यूरोप के लिए डरावनी है
अगर रूस किसी नाटो सैन्य मुख्यालय, एयरबेस, बंदरगाह या बिजली संयंत्र पर बैलिस्टिक मिसाइलों की सीमित, लेकिन तेज बौछार कर दे तो रक्षा अधिकारियों की चिंता है कि यूरोप को भी वही स्थिति झेलनी पड़ सकती है, जो आज यूक्रेन झेल रहा है-मिसाइल सामने और उसे रोकने के लिए पर्याप्त इंटरसेप्टर नहीं। रूस के खतरे को इसलिए भी हल्के में नहीं लिया जा सकता क्योंकि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के मुताबिक रूस के पास लगभग ६००-६३० शक्तिशाली हाई-स्पीड बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं और उत्पादन बढ़ाने की योजना भी है।
हालांकि, तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर इस बात से इनकार किया है कि अमेरिका के पास अपनी सैन्य आवश्यकताओं को पूरा करने लायक इंटरसेप्टर नहीं हैं। साथ ही रूस खुद यूक्रेन युद्ध में भारी सैन्य संसाधन झोंक रहा है, इसलिए निकट भविष्य में नाटो के खिलाफ नया पूर्ण युद्ध खोलना उसके लिए भी बेहद जोखिमपूर्ण होगा, लेकिन रणनीति में खतरा हमेशा पूर्ण युद्ध से नहीं आता। रूस को यदि यह महसूस हो जाए कि यूरोप की मिसाइल ढाल कमजोर है, तो सीमित हमला, सैन्य दबाव या नाटो की प्रतिक्रिया क्षमता को जांचने का प्रलोभन बढ़ सकता है।
ईरान युद्ध ने अमेरिका के सामने खड़ा कर दिया है असहज सवाल
मध्य-पूर्व को बचाते-बचाते क्या ट्रंप प्रशासन ने यूरोप की ढाल ही खाली कर दी? और यदि एक ही समय ईरान, रूस और किसी तीसरे मोर्चे पर संकट खड़ा हुआ तो क्या अमेरिका के पास पर्याप्त हथियार होंगे?

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