शीतल अवस्थी
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन्हें सामूहिक रूप से `नवदुर्गा’ कहा जाता है। प्रत्येक स्वरूप शक्ति, साधना और जीवन के एक विशेष गुण का प्रतीक है। प्रतिपदा से नवमी तक क्रमशः एक देवी की आराधना का विधान है।
1. मां शैलपुत्री
पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण देवी का नाम शैलपुत्री पड़ा। वे वृषभ पर सवार हैं। दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण करती हैं। उनकी पूजा से साधक को स्थिरता और आत्मविश्वास मिलने की मान्यता है।
मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।
भोग: गाय का घी।
2. मां ब्रह्मचारिणी
मां पार्वती के कठोर तपस्विनी स्वरूप को ब्रह्मचारिणी कहा जाता है। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे में कमंडल रहता है। वे तप, त्याग, संयम और ज्ञान की प्रतीक हैं।
मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
भोग: शक्कर या मिश्री।
3. मां चंद्रघंटा
देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। उनका वाहन सिंह है और वे अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं। यह स्वरूप साहस, वीरता और भय से मुक्ति प्रदान करने वाला माना जाता है।
मंत्र: ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः।
भोग: दूध अथवा दूध से बनी मिठाई।
4. मां कूष्मांडा
मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। वे सूर्यलोक में निवास करने वाली आदिशक्ति मानी जाती हैं। उनकी आठ भुजाएं हैं, इसलिए उन्हें अष्टभुजा भी कहा जाता है।
मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः।
भोग: मालपुआ।
5. मां स्कंदमाता
भगवान कार्तिकेय यानी स्कंद की माता होने के कारण देवी को स्कंदमाता कहा जाता है। वे सिंह पर विराजमान हैं और अपनी गोद में बाल स्कंद को धारण करती हैं। उनकी पूजा से मातृत्व, वात्सल्य और पारिवारिक सुख प्राप्त होने की मान्यता है।
मंत्र: ॐ देवी स्कंदमातायै नमः।
भोग: केला।
6. मां कात्यायनी
महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रकट होने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। उन्होंने महिषासुर का वध किया था। यह स्वरूप न्याय, साहस और विजय का प्रतीक है। विवाह में आ रही बाधाएं दूर करने के लिए भी उनकी पूजा की जाती है।
मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।
भोग: शहद।
7. मां कालरात्रि
मां कालरात्रि का स्वरूप उग्र है, लेकिन वे अपने भक्तों को शुभ फल देती हैं; इसलिए उन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है। उनका वाहन गर्दभ है। वे भय, नकारात्मक शक्तियों और संकटों का नाश करने वाली मानी जाती हैं।
मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः।
भोग: गुड़।
8. मां महागौरी
कठोर तप के बाद भगवान शिव की कृपा से देवी का वर्ण अत्यंत गौर हो गया, इसलिए उन्हें महागौरी कहा गया। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और वृषभ पर सवार हैं। यह स्वरूप शांति, पवित्रता और सौभाग्य का प्रतीक है।
मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः।
भोग: नारियल।
9. मां सिद्धिदात्री
नवदुर्गा का अंतिम स्वरूप मां सिद्धिदात्री है। वे सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं। कमल पर विराजमान देवी के चार हाथों में चक्र, गदा, शंख और कमल सुशोभित हैं।
मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः।
भोग: तिल अथवा उससे बने व्यंजन।
नवदुर्गा की आराधना केवल इच्छापूर्ति का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन में स्थिरता, तप, साहस, सृजन, वात्सल्य, न्याय, निर्भयता, पवित्रता और सिद्धि जैसे नौ गुणों को अपनाने की साधना भी है। अलग-अलग क्षेत्रों और कुल-परंपराओं में भोग, रंग तथा पूजा-विधान में कुछ अंतर मिल सकता है।
