मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना भारतीयों की ईमानदारी के सबसे निचले स्तर को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि आम भारतीय ने भ्रष्टाचार को सामान्य मान लिया है और पकड़े जाने तक उसे गलत नहीं समझता। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल 2025 की रिपोर्ट में 182 देशों में भारत का 91वां स्थान होने के बावजूद “हमें शर्म नहीं आती।”
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी से जुड़ा हालिया विवाद “ऊंट की पीठ पर आखिरी तिनके” जैसा है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में हुई चोरी से भी जो लोग प्रभावित नहीं होते, उन्हें कोई शर्मिंदा नहीं कर सकता। मंगलवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार और मंदिर में चोरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में संशोधन किया जाना चाहिए। चढ़ावा चोरी के दोषियों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की बुलडोजर कार्रवाई पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि अवैध कॉलोनियों में रहने वाले अधिकांश लोग गरीबी और बेरोजगारी के कारण वहां रहने को मजबूर होते हैं।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ एक मामले में बुलडोजर कार्रवाई पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका हमीरपुर निवासी फैमुद्दीन एवं अन्य की ओर से दायर की गई है। उनकी ओर से अधिवक्ता शमशुद्दीन खान, सैयद अहमद, फैजान और जहीर असगर ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनके रिश्तेदार आफान खान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और उत्तर प्रदेश अवैध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद पुलिस और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से उनकी संपत्तियों को निशाना बनाया जा रहा है। याचिका में आशंका जताई गई कि उनका घर, इंडियन लॉज और आरा मशीन बुलडोजर से गिराई जा सकती है। उन्होंने कोर्ट से अपनी संपत्तियों की सुरक्षा की मांग की। उनका तर्क था कि केवल एफआईआर के आधार पर किसी की संपत्ति के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करना उचित नहीं है।
इस पर न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने प्रदेश सरकार की हालिया बुलडोजर कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार आरोपियों के घर इसलिए ढहा रही है, ताकि लोगों को “बुलडोजर न्याय” की आदत पड़ जाए। उन्होंने अपने आदेश में शायर बशीर बद्र का यह शेर भी उद्धृत किया- “लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।”
हालांकि, इस मामले में न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की राय से न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन सहमत नहीं थे। मतभेद होने के कारण मामले को तीसरे न्यायाधीश के समक्ष सुनवाई के लिए भेज दिया गया।
राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता प्रियंका मिड्ढा ने न्यायालय को बताया कि याचिका में तथ्यों को छिपाया गया है। “इंडियन लॉज” सिंचाई विभाग की भूमि पर बना है तथा वर्ष 2021 की एक जनहित याचिका में पहले ही अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए जा चुके हैं।
पुलिस की ओर से न्यायालय को बताया गया कि 16 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म, आपत्तिजनक वीडियो बनाने, ब्लैकमेल करने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने जैसे गंभीर आरोप हैं। यह घटना इसी “इंडियन लॉज” में हुई बताई गई है। जांच में याचिकाकर्ता फैमुद्दीन की भूमिका भी सामने आई है और उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। आरा मशीन के विरुद्ध वन विभाग द्वारा अलग से कार्रवाई की जा रही है, क्योंकि वहां से संरक्षित प्रजाति की लकड़ी बरामद हुई थी।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में संशोधन कर दोषियों के लिए मृत्युदंड के प्रावधान पर विचार किया जा सकता है।
